दिल्ली अक्षरधाम में भगवान स्वामीनारायण के बाल स्वरूप 'नीलकंठ वर्णी' की 108 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का हुआ प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव
अभिकान्त, 26 मार्च हरियाणा : देश की राजधानी स्थित विश्वप्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर परिसर आज एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक घटना का साक्षी बना। भगवान स्वामीनारायण के बाल तपस्वी स्वरूप 'नीलकंठ वर्णी' की 108 फीट ऊंची विशालकाय प्रतिमा का भव्य प्रतिष्ठा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। बीती रात से ही दिल्ली के आसमान में भक्ति की लहरें उठ रही थीं, जो आज सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचीं।
यह गगनचुंबी प्रतिमा भगवान स्वामीनारायण के उस ऐतिहासिक कालखंड को समर्पित है, जब उन्होंने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में गृहत्याग कर 'नीलकंठ वर्णी' के रूप में सात वर्षों तक संपूर्ण भारत की पदयात्रा की थी। प्रतिमा में उन्हें पुलहाश्रम (हिमालय) में एक पैर पर खड़े होकर गहन ध्यानमग्न मुद्रा में दर्शाया गया है। यह स्वरूप उनके उस कठोर तप का प्रतीक है, जिसमें उन्होंने चार महीनों तक बिना अन्न और जल (निर्जल-निरन्न) के कठिन साधना की थी। 108 फीट की यह ऊंचाई न केवल कलात्मक भव्यता को दर्शाती है, बल्कि नीलकंठ वर्णी की दिव्य ऊर्जा और उनके कल्याणकारी संकल्प को भी प्रतिध्वनित करती है।
इस ऐतिहासिक महोत्सव का आयोजन बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण संस्था के वर्तमान आध्यात्मिक प्रमुख, परम पूज्य महंतस्वामी महाराज के मार्गदर्शन और पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। प्रतिष्ठा की मुख्य विधि शास्त्रों में वर्णित प्राचीन वैदिक अनुष्ठानों के अनुसार की गई। इस पावन अवसर पर भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और खाड़ी देशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे पुरुष, महिलाएं और बच्चे सुबह से ही अक्षरधाम परिसर में एकत्रित होने लगे थे, जिससे पूरा वातावरण लघु भारत के रूप में परिवर्तित हो गया।
महोत्सव के दौरान संपूर्ण अक्षरधाम परिसर भजनों, सामूहिक प्रार्थनाओं और वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ से गुंजायमान रहा। जब महंतस्वामी महाराज ने प्रतिमा की आरती उतारी, तो उपस्थित जनसमूह के 'जय स्वामीनारायण' के जयकारों से दिशाएं गूंज उठीं। यह प्रतिमा अब न केवल दिल्ली के पर्यटन मानचित्र पर एक नया आकर्षण होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए त्याग, तपस्या और आत्मिक शांति का प्रेरणा केंद्र भी बनेगी।
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