पंजाब हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब क्लर्क से सचिव तक एक समान DA; 7.5 लाख कर्मचारियों-पेंशनर्स को राहत।
अभिकान्त, 08 अप्रैल पंजाब : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज पंजाब सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए एक क्रांतिकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों को आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), आईएफएस (IFS) और न्यायिक अधिकारियों के समान ही महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए। इस फैसले से राज्य के प्रशासनिक ढांचे में व्याप्त भत्ते के भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के उस मौजूदा ढांचे पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें उच्च श्रेणी के अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में असमानता थी। अदालत ने निर्देश दिया कि महंगाई का प्रभाव सभी श्रेणियों के कर्मचारियों पर समान होता है, इसलिए भत्ते के निर्धारण में अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कोई अंतर नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने सरकार को पाबंद किया है कि वह 30 जून 2026 तक सभी पात्र कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़े हुए डीए (DA) का भुगतान सुनिश्चित करे।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में वर्तमान में 3.5 लाख से अधिक नियमित सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि पेंशनभोगियों की संख्या 4 लाख से अधिक है। हाईकोर्ट के इस आदेश से लगभग 7.5 लाख परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ होगा। लंबे समय से कर्मचारी संगठन महंगाई भत्ते की किस्तों और बकाया राशि को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, ऐसे में न्यायिक हस्तक्षेप ने उनकी मांगों को एक मजबूत आधार प्रदान किया है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 के लिए तय की है। तब तक सरकार को भुगतान की रिपोर्ट पेश करनी होगी। अब देखना यह होगा कि पंजाब सरकार इस भारी वित्तीय बोझ को वहन करने के लिए क्या कदम उठाती है। वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'समान काम, समान न्याय' की जीत बताया है।
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