उच्च प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी बीमारियाँ, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ गया है

भारत में प्रदूषण की स्थिति, खासकर वायु प्रदूषण, गंभीर बनी हुई है और यह देश के कई हिस्सों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

यहाँ भारत में आज (25 अक्टूबर 2025) की प्रदूषण की स्थिति के कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं, जो हाल के वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और रिपोर्टों पर आधारित हैं:

देश के कई प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता 'खराब' से 'बहुत खराब' और कुछ स्थानों पर 'गंभीर' श्रेणी में है।

दिल्ली और NCR के आस-पास के शहरों (जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में प्रदूषण का स्तर 'बहुत खराब' (Very Poor) श्रेणी में है, कई स्थानों पर AQI 300 के पार बना हुआ है।

हाल ही में, दिवाली के बाद पटाखों और मौसमी बदलावों (जैसे हवा की गति में कमी) के कारण प्रदूषण में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे कई निगरानी स्टेशनों पर AQI 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में भी दर्ज किया गया था।

कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में भी वायु गुणवत्ता अक्सर 'खराब' (Poor) से 'बहुत खराब' श्रेणी में रहती है।

दक्षिण भारत के शहरों जैसे चेन्नई और हैदराबाद में स्थिति आमतौर पर उत्तर भारत की तुलना में बेहतर, लेकिन फिर भी 'मध्यम' (Moderate) या 'खराब' श्रेणी में देखी जाती है।

मुख्य प्रदूषक: हवा में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) की सांद्रता बहुत अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

वायु प्रदूषण यह भारत में प्रदूषण का सबसे बड़ा मुद्दा है।

वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य की धूल, पराली जलाना (फसलों के अवशेष), और दिवाली जैसे त्योहारों पर आतिशबाजी मुख्य कारण हैं।

उच्च प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी बीमारियाँ, हृदय रोग और कैंसर का खतरा बढ़ गया है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में।

देश की कई प्रमुख नदियाँ (जैसे गंगा, यमुना) और अन्य जलस्रोत औद्योगिक कचरे, सीवेज और कृषि अपवाह के कारण प्रदूषित हैं।

यह पीने के पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है और जलजनित रोगों के फैलने का कारण बनता है।

कई शहरों में ठोस कचरे का उचित प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है, जिससे लैंडफिल साइट्स (कचरा डंप करने की जगहें) प्रदूषण का स्रोत बनी हुई हैं।

वायु गुणवत्ता के 'बहुत खराब' या 'गंभीर' होने पर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण लागू किए जाते हैं, जिसमें निर्माण कार्यों पर रोक, ईंट भट्टों और गर्म मिश्रण संयंत्रों को बंद करने जैसे उपाय शामिल हैं।

सरकारें प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने और औद्योगिक उत्सर्जन मानकों को सख्त करने जैसे उपाय कर रही हैं।

संक्षेप में, आज भारत में प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है, खासकर उत्तर भारत के बड़े शहरी क्षेत्रों में, जहाँ वायु गुणवत्ता अक्सर खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है। इससे निपटने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपायों की आवश्यकता है।

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