• 24/09/26

अंबाला में धारा 163 लागू - फसल अवशेष जलाने पर होगी सख्त कार्रवाई, दर्ज हो सकती है एफआईआर- जिलाधीश

अम्बाला , 24 सितंबर (अभिकान्त) : धान की फसल की कटाई के सीजन को देखते हुए जिलाधीश ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत आदेश लागू किए हैं। इन आदेशों के तहत धान/जीरी की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेष, पराली एवं भूसे को जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। जिला प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को किसी भी परिस्थिति में आग न लगाएं तथा पराली का वैज्ञानिक एवं उचित तरीके से प्रबंधन करें। प्रशासन द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर निगरानी रखी जा रही है और आदेशों की अवहेलना करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई किसान खेत में धान की पराली या अन्य फसल अवशेष जलाता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। आदेश की अवहेलना के मामलों में भारतीय न्याय सहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।


जिले में फसल अवशेषों को जलाने की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से रोक लगाने तथा किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण दिमाग द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। कृषि विभाग, अम्बाला के उप निदेशक डॉ वजीर सिंह ने बताया कि जिले में सभी संबंधित फील्ड स्टाफ, अधिकारियों एवं नोडल अधिकारियों की डयूटी लगाई गई है। ये अधिकारी एवं कर्मचारी दिन-रात गांवों एव खेतों में जाकर फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाओं की निगरानी कर रहे हैं तथा किसानों को मौके पर ही फसल अवशेषों उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडत्ता है। आग लगाने से खेत में मौजूद मित्र कीट एवं सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं तथा मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्वों को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अतिरिक्त घुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


उपायुक्त अम्बाला के दिशा-निर्देशानुसार गांवों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ गांव स्तर पर भी निगरानी एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सम्बन्धित टीमें किसानों से संपर्क कर उन्हें फसल अवशेष न जलाने तथा उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पराली प्रबंधन करने के लिए प्रेरित कर रही है। इसके अतिरिक्त, बच्चों एवं ग्रामीणों को भी फसल अवशेष न जलाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। विनिन्न स्थानों पर जागरुकता गतिविधियों के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष जलाने के दुष्परिणामों एवं कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है।


कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि धान की कटाई के बाद खेत में बचे अवशेषों को आग लगाने की बजाय उनका उचित प्रबंधन करें। किसान उपलब्ध कृषि यंत्रों जैसे सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्राचॉपर एवं रोटावेटर आदि का प्रयोग कर सकते हैं। फसल अवशेषों को खेत में उचित तरीके से मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बनाए रखने में सहायता मिलती है तथा मिट्टी की गुणवत्ता एवं उर्वरा शक्ति को भी लाभ होता है।


वायु प्रदूषण बढ़ता है और वातावरण में धुआं फैलता है, मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव प्रभावित होते हैं, मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, खेतों में मौजूद जैविक पदार्थ नष्ट होता है, आग आसपास के खेतों एवं संपत्ति तक फैलने का खतरा रहता है, सडक़ के नजदीक पराली जलाने से धुएं के कारण दृश्यता प्रभावित हो सकती है।


कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। किसानों को पराली प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों तथा उपलब्ध कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों द्वारा किसानों से यह भी अपील की जा रही है कि ये स्वयं पराली न जलाएं और अपने आसपास के अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करें। जिला प्रशासन, कृषि विभाग तथा संबंधित विभागों द्वारा फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

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