नेपाल में मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार और आर्थिक अवसरों की कमी से युवा आक्रोश ने सत्ता को हिला दिया
नेपाल में हाल के दिनों में मुख्य घटनाक्रम युवाओं (Gen Z) के नेतृत्व वाले बड़े विरोध प्रदर्शनों का है, जो सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, भ्रष्टाचार और आर्थिक अवसरों की कमी के खिलाफ शुरू हुए। ये प्रदर्शन 4 सितंबर 2025 को सरकार द्वारा 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, एक्स, यूट्यूब आदि) पर अचानक लगाए गए प्रतिबंध से भड़के। प्रदर्शनकारी सरकार को उखाड़ फेंकने और सामूहिक इस्तीफों की मांग कर रहे हैं।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देशों में हाल के बदलावों जैसा है, जहां विदेशी ताकतें (जैसे अमेरिका या अन्य) शामिल हो सकती हैं।
काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह (जो न्यूवार बौद्ध परिवार से हैं) को संभावित अगला पीएम माना जा रहा है, जो भारत-विरोधी हैं और 'ग्रेटर नेपाल' दावों का समर्थन करते हैं। कुछ एक्स पोस्ट्स में इसे भारत के लिए खतरा बताया गया है।
हालांकि, अधिकांश रिपोर्ट्स इसे युवाओं की वास्तविक नाराजगी बताती हैं, जो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक सिस्टम से तंग आ चुके है । कोई ठोस सबूत साजिश के नहीं मिले, लेकिन साजिश सिद्धांत सोशल मीडिया पर फैले हुए हैं।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दियाबता ।
अब सेना संसद की रक्षा कर रही है और सड़कों पर गश्त कर रही है।
प्रदर्शनकारी पूरे मंत्रिमंडल के इस्तीफे और नई सरकार की मांग कर रहे हैं, जो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा सकती है। संभावित नए चुनाव या गठबंधन सरकार बन सकती है।
लंबे समय में, नेपाल को जलवायु जोखिमों (बाढ़, भूस्खलन) से निपटने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत है, जैसे जलवायु-प्रतिरोधी पुल और चेतावनी सिस्टम।
आर्थिक रूप से, युवाओं के लिए रोजगार और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण महत्वपूर्ण होगा, वरना अस्थिरता जारी रह सकती है।
यह जानकारी वर्तमान स्रोतों पर आधारित है; स्थिति तेजी से बदल सकती है।
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