*“मेरा काम ही मेरा परिचय है”: अनिल विज*
के.के
भारतीय राजनीति में ऐसे नेता विरले ही होते हैं जिनकी पहचान भाषणों, प्रचार अभियानों या बड़े-बड़े वादों से नहीं, बल्कि उनके निरंतर काम, स्पष्ट निर्णयों और जनता के बीच उनकी मौजूदगी से बनती है। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल विज ऐसे ही नेताओं में शुमार हैं, जिनके व्यक्तित्व और राजनीतिक जीवन को एक ही पंक्ति में समेटा जा सकता है--“मेरा काम ही मेरा परिचय है।” यह कथन केवल एक विचार नहीं, बल्कि उनके पूरे सार्वजनिक जीवन का प्रतिबिंब है।
अनिल विज का राजनीति में प्रवेश किसी तात्कालिक महत्वाकांक्षा या पद की लालसा से प्रेरित नहीं रहा। उन्होंने राजनीति को सदैव जनसेवा और जिम्मेदारी के रूप में देखा है। उनके लिए सत्ता साध्य नहीं, बल्कि साधन रही है। वर्षों से वे जिस स्पष्टवादिता और दृढ़ता के साथ जनता के मुद्दों को उठाते आए हैं, उसने उन्हें एक अलग पहचान दी है। वे न तो लोकप्रियता के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करते हैं और न ही दबाव में आकर अपने निर्णय बदलते हैं।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनकी बेबाक और साफ़ भाषा है। अनिल विज जो सोचते हैं, वही कहते हैं और जो कहते हैं, उसे ज़मीन पर उतारने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि वे समर्थकों के साथ-साथ विरोधियों के बीच भी चर्चा का विषय बने रहते हैं। विज मानते हैं कि लोकतंत्र में जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और नेताओं का कर्तव्य है कि वे बिना किसी लाग-लपेट के सच सामने रखें।
अनिल विज उन मंत्रियों में शामिल हैं जो वातानुकूलित दफ्तरों तक सीमित नहीं रहते। वे अक्सर स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्याओं का निरीक्षण करते हैं। चाहे बिजली आपूर्ति की स्थिति हो, निर्माण का काम हो, अस्पतालों की व्यवस्था हो या श्रम विभाग से जुड़ी शिकायतें-वे हर जगह सक्रिय भूमिका निभाते हैं। हम समझते है कि उनका मानना है कि फाइलों में लिखी रिपोर्ट और ज़मीनी सच्चाई में अक्सर अंतर होता है, और इस अंतर को केवल मौके पर जाकर ही समझा जा सकता है।
ऊर्जा मंत्री के रूप में उन्होंने बिजली व्यवस्था में सुधार को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। बिजली चोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाना, समय पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। उन्होंने बार-बार स्पष्ट किया कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उनके निर्देशों का असर यह रहा कि व्यवस्था में अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ी।
परिवहन विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए अनिल विज ने परिवहन गुणवत्ता, यातायात सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। इनके लिए वे लगातार समीक्षा बैठकें करते रहे। उनका मानना है कि अच्छी सड़कें और परिवहन केवल विकास का संकेत नहीं होतीं, बल्कि आर्थिक प्रगति और आम नागरिक की सुरक्षा से भी सीधा संबंध रखती हैं।
श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने श्रमिकों के हितों की रक्षा को सर्वाेपरि रखा। योजनाओं में पारदर्शिता, लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे, और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई-यह उनकी स्पष्ट नीति रही है। कथित घोटालों पर उनका रुख हमेशा साफ रहा है कि जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी होगी, चाहे वह किसी भी सरकार या व्यक्ति से जुड़ा हो। उनके लिए कानून सबके लिए समान है।
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी अनिल विज का दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट और सख्त रहा है। वे मानते हैं कि बिना मजबूत कानून व्यवस्था के विकास संभव नहीं है। उन्होंने कई अवसरों पर कहा है कि अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकार द्वारा असामाजिक तत्वों के खिलाफ की गई कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान शासन कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर है।
अनिल विज राजनीति में जवाबदेही की संस्कृति को मजबूती से स्थापित करने में विश्वास रखते हैं। वे केवल सवाल उठाने वाले नेता नहीं, बल्कि जनता के सवालों का जवाब देने वाले मंत्री भी हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब सरकार जनता के प्रति जवाबदेह हो। वे आलोचना से घबराते नहीं, बल्कि उसे आत्ममंथन और सुधार का अवसर मानते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा की वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर भी अनिल विज का दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट और संतुलित रहा है। वे मानते हैं कि आरएसएस विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन है, जिसके विभिन्न विंग स्वतंत्र रूप से समाज सेवा के कार्यों में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इन संगठनों की भूमिका राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण रही है और वे अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र निर्णय लेते हैं।
अनिल विज ऐसे नेता हैं जिनकी बातों पर राजनीतिक गलियारों में गंभीरता से चर्चा होती है। उनकी स्पष्ट टिप्पणियां कई बार बहस का विषय बनती हैं, लेकिन वे व्यक्तिगत आरोपों से दूर रहते हुए मुद्दों पर केंद्रित रहते हैं। यही वजह है कि उनकी राजनीतिक मौजूदगी प्रभावशाली मानी जाती है।
आज के दौर में जब राजनीति में प्रचार, छवि निर्माण और सोशल मीडिया की भूमिका बढ़ गई है, अनिल विज काम को ही अपनी पहचान मानते हैं। वे मानते हैं कि यदि काम ईमानदारी और निष्ठा से किया जाए, तो जनता स्वयं नेता की पहचान बना देती है। लंबे समय तक जनता का विश्वास केवल और केवल काम के आधार पर ही अर्जित किया जा सकता है।
युवाओं के लिए उनका संदेश भी स्पष्ट है। वे युवाओं से कहते और उम्मीद रखते हैं कि राजनीति को करियर नहीं, बल्कि सेवा समझकर अपनाएं। अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण के बिना न तो राजनीति में सफलता संभव है और न ही समाज में बदलाव। उनका मानना है कि देश और प्रदेश का भविष्य युवाओं के हाथ में है और उन्हें सही दिशा देने की जिम्मेदारी भी नेतृत्व की है।
अनिल विज का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब नीयत साफ हो और कर्म मजबूत हों, तो परिचय की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे न तो दिखावे की राजनीति करते हैं और न ही खोखले वादों में विश्वास रखते हैं। उनकी पहचान उनके फैसलों, उनकी सख्ती, उनकी संवेदनशीलता और उनके निरंतर प्रयासों से बनी है।
आज जब जनता ऐसे नेताओं की तलाश में है जो बोलने से ज्यादा करने में विश्वास रखते हों, अनिल विज उस कसौटी पर खरे उतरते हैं। वे केवल एक मंत्री या राजनेता नहीं, बल्कि एक कर्मठ जननेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनका परिचय नाम से नहीं, बल्कि उनके काम से होता है। वास्तव में, “मेरा काम ही मेरा परिचय है” अनिल विज के व्यक्तित्व, विचार और राजनीतिक यात्रा का सटीक सार है।
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