24/09/26

हरियाणा में MSME के लिए लागू हुआ 'राइट टू बिजनेस एक्ट-2026': 25 दिनों में मिलेगी 'डीम्ड अप्रूवल'

हरियाणा , 24 सितंबर (अभिकान्त) : हरियाणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की स्थापना प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 'हरियाणा राइट टू बिजनेस एक्ट-2026' को लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत नई विनिर्माण इकाई लगाने या मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने वाले पंजीकृत उद्यमियों को शुरुआती स्तर पर 'इन-प्रिंसिपल अप्रूवल' देने के लिए जिला और राज्य स्तर पर निश्चित समयसीमा तय कर दी गई है। निर्धारित समय में फैसला न होने पर आवेदन स्वतः मंजूर यानी 'डीम्ड अप्रूवल' की श्रेणी में आ जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई को जिला नोडल एजेंसी के समक्ष 'डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट' जमा करना होगा। जिला स्तरीय क्लीयरेंस कमेटी को 15 कार्यदिवस के भीतर आवेदन पर स्वीकृति या अस्वीकृति का फैसला करना होगा। यदि 15 दिनों में कोई निर्णय नहीं होता, तो आवेदन स्वतः राज्य स्तर पर हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर के डिप्टी सीईओ के पास स्थानांतरित हो जाएगा। राज्य स्तर पर अगले 10 कार्यदिवस में निर्णय लेना अनिवार्य होगा। इस तरह कुल 25 कार्यदिवस में निर्णय न होने की स्थिति में आवेदन को डीम्ड अप्रूवल प्राप्त माना जाएगा और जिला नोडल एजेंसी को तीन दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना होगा।

इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिलने के बाद संबंधित एमएसएमई इकाई को 36 महीने यानी तीन साल की मोराटोरियम अवधि मिलेगी। इस अवधि के दौरान औद्योगिक इकाई का कोई सामान्य सरकारी निरीक्षण नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, यदि किसी इकाई के खिलाफ अनधिकृत निर्माण, गलत भू-उपयोग, अग्नि सुरक्षा या जनसुरक्षा के उल्लंघन से जुड़ी शिकायत मिलती है, तो सक्षम प्राधिकारी के लिखित आदेश पर संयुक्त निदेशक या उससे उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा जांच कराई जा सकेगी, जिसकी ऑनलाइन रिपोर्ट 48 घंटे में अपलोड करना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन-प्रिंसिपल अप्रूवल अंतिम कागजी प्रक्रिया का विकल्प नहीं है। उद्यमी को तीन साल की मोराटोरियम अवधि समाप्त होने से पहले 'इन्वेस्ट हरियाणा सिंगल विंडो पोर्टल' के माध्यम से सीएलू, फायर एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति, भवन नक्शा और श्रम विभाग से जुड़ी सभी आवश्यक वैधानिक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी। यदि किसी स्थिति में जिला या राज्य स्तर पर आवेदन खारिज होता है, तो उद्यमी को निर्णय के 30 दिनों के भीतर राज्य नोडल एजेंसी या एम्पावर्ड एग्जीक्यूटिव कमेटी के समक्ष अपील दायर करने का अधिकार दिया गया है।

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