18 साल पुराने कोकीन तस्करी मामले में मोहाली कोर्ट का बड़ा फैसला: दारा सिंह और पूर्व DSP को 3-3 साल की कैद
पंजाब , 03 सितंबर (अभिकान्त) : मोहाली की विशेष प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) अदालत ने वर्ष 2008 के करीब 18 साल पुराने कोकीन तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी दारा सिंह और हरियाणा पुलिस के पूर्व डीएसपी गुरदर्शन सिंह को PMLA एक्ट की धारा 4 के तहत दोषी ठहराते हुए 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों दोषियों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें एक महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद जमानत पर चल रहे दोनों दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।
यह मामला 28 अगस्त 2008 का है, जब सोहाना पुलिस थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने चेकिंग के दौरान आरोपियों के कब्जे से 1 किलो 230 ग्राम कोकीन बरामद की थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये थी। इससे पहले वर्ष 2015 में विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने दारा सिंह को धारा 22 और गुरदर्शन सिंह को धारा 29 के तहत दोषी ठहराते हुए 12-12 साल की सजा सुनाई थी। नशीले पदार्थों की इस बड़ी खेप के कारण प्रवर्तन निदेशालय (ED) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने 20 अक्टूबर 2009 को ECIR दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच शुरू की थी और 2022 में अदालत में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक मोनिका ठाकुर ने दलील प्रस्तुत की कि जब्त की गई कोकीन और सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल किए गए 10 लाख रुपये के दो चेक (एक 6 लाख रुपये और दूसरा 4 लाख रुपये का) पूरी तरह से 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' यानी अपराध से अर्जित संपत्ति के दायरे में आते हैं। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि जांच के दौरान ईडी को आरोपियों के बैंक खातों में कोई मनी ट्रेल नहीं मिला और दोनों चेक भी कभी कैश नहीं कराए गए थे, साथ ही उम्र और बीमारियों के आधार पर राहत की मांग की गई थी।
विशेष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों के अहम फैसलों का हवाला देते हुए बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस मामले में बरामद कंट्राबैंड और उसकी खरीद-फरोख्त के लिए जारी किए गए चेक PMLA की धारा 2(1)(u) के तहत 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' की श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा अदालत ने आदेश दिया कि केस की जांच या सुनवाई के दौरान दोनों दोषियों द्वारा पहले ही जेल में काटी जा चुकी हिरासत की अवधि को उनकी मुख्य 3 साल की सजा में से घटाकर समायोजित किया जाएगा।
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