बांग्लादेश में ISI का कथित “सेल” खुलना — भारत और क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी?

यदि बांग्लादेश में पाकिस्तान की ISI के किसी सेल/नेटवर्क के सक्रिय होने की बातें सही सिद्ध होती हैं, तो यह भारत, बांग्लादेश और पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान और हसीना के सत्ता से हटने के बाद, ISI ने बांग्लादेश में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI ने ढाका में पाकिस्तानी हाई कमीशन के अंदर एक स्पेशल "ढाका सेल" बनाया है, जो आतंकवादियों और कट्टरपंथियों को तैयार करने का काम करता है।

🔴 भारत की सुरक्षा के लिए खतरा

पूर्वी भारत में आतंक नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश हो सकती है।

भारत का पूर्वोत्तर हिस्सा एक पतली पट्टी से मुख्य भूमि से जुड़ा है। बांग्लादेश में अस्थिरता या भारत-विरोधी तत्वों की मौजूदगी इस रास्ते के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ, कट्टरपंथ और अवैध गतिविधियाँ बढ़ने का जोखिम।

भारत के उत्तर-पूर्वी उग्रवादी समूहों (जैसे ULFA) ने बांग्लादेश की धरती का उपयोग सुरक्षित ठिकानों के रूप में किया है। ISI की मौजूदगी इन समूहों को फिर से जीवित कर सकती है।

फर्जी मुद्रा, हथियार और ड्रग्स तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है।

🔴 ISI जैसे बाहरी तत्वों की मौजूदगी से

कट्टरपंथी संगठनों को हवा

राजनीतिक अस्थिरता

सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर दबाव बढ़ सकता है

रणनीतिक रूप से यह भारत को घेरने (Encirclement) की नीति का हिस्सा हो सकता है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Chicken’s Neck) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर अप्रत्यक्ष दबाव।

मुख्य लक्ष्य भारत के खिलाफ है – पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता पैदा करना, घुसपैठ बढ़ाना, और आतंकी नेटवर्क मजबूत करना। साथ ही, बांग्लादेश में अस्थिरता बनाए रखना और अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) के साथ रक्षा और इंटेलिजेंस सहयोग बढ़ाना।

दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग अब तक मजबूत रहा है।

ऐसी गतिविधियाँ यदि बढ़ती हैं, तो

खुफिया समन्वय और बॉर्डर मैनेजमेंट और मजबूत करना पड़ेगा।

बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ सकता है।

🛡️ भारत को क्या करना चाहिए?

खुफिया एजेंसियों की सतर्कता और साझा ऑपरेशन

बांग्लादेश के साथ राजनयिक और सुरक्षा संवाद

सीमा पर BSF–BGB समन्वय को और सशक्त करना

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंक प्रायोजकों को बेनकाब करना

निष्कर्ष

👉 बांग्लादेश में ISI के किसी भी तरह के नेटवर्क की मौजूदगी सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि संभावित रणनीतिक खतरा है।

👉 समय रहते कड़ा एक्शन और सहयोग ही इसका जवाब है, वरना इसका असर भारत की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर पड़ सकता है।

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