प्राकृतिक कृषि उत्पादों की एमएसपी तय कर हिमाचल बना देश के लिए मॉडल
हिमाचल, 14 अप्रैल (अभी): प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित कर हिमाचल ने देश के लिए मॉडल स्थापित किया है। यह कहना है देश के जाने माने खाद्य नीति विश्लेषक और कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का। उन्होंने कहा है कि एमएसपी तय होने से हिमाचल के किसान जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित होंगे और रसायनों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता भी प्रभावित नहीं होगी। शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूरे देश को हिमाचल मॉडल अपनाने का भी सुझाव दिया है।
जैविक कृषि उत्पादों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की नीति पूरे देश के लिए पथ प्रदर्शक है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल ने गाय और भैंस के दूध के लिए उच्च खरीद मूल्य की घोषणा की थी और इस बजट में इसमें वृद्धि की है। गाय के दूध के लिए खरीद मूल्य 45 रुपये से बढ़ा कर 51 रुपये और भैंस के दूध के लिए 55 रुपये से बढ़ा कर 61 रुपये प्रति लीटर दाम तय किया है।
एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देश का ज्वलंत मुद्दा है, पंजाब के किसान संगठन एक वर्ष से इसका मांग कर रहे हैं। इन बीच हिमाचल ने जैविक उत्पादों के लिए उच्च एमएसपी तय की है। साल 2025-26 के लिए केंद्र की ओर से गेहूं के लिए घोषित 24.25 रुपये प्रतिकिलो एमएसपी के मुकाबले हिमाचल ने जैविक गेंहू के लिए 60 रुपये एमएसपी घोषित किया है, जो 35.75 रुपये अधिक है।
मक्की के लिए केंद्र की ओर से घोषित 22.25 रुपये के मुकाबले हिमाचल ने जैविक मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम दाम घोषित किया है यह 17.75 रुपये अधिक है। गेहूं और मक्की को खरीद केंद्रों तक ले जाने के लिए दो रुपये प्रतिकिलो परिवहन सब्सिडी की भी घोषणा की है। जैविक कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रतिकिलो दाम घोषित किया है जबकि बाजार भाव 25 से 30 रुपये प्रतिकिलो है। 2025-26 में एक लाख लोगों को जैविक खेती से जोड़ने का लक्ष्य भी प्रदेश की दीर्घकालीन सोच दिखाता है।