ग्रीन एनर्जी में हरियाणा नई पहचान की ओर – ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में देश के साथ हरियाणा की मजबूत भागीदारी
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पी. कुमार, 8 जुलाई 2025, चंडीगढ़
हरियाणा, ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। वर्तमान में देश में कुल बिजली की स्थापित क्षमता 4,75,590 मेगावाट है, जिसमें से 49.5 प्रतिशत बिजली का उत्पादन नॉन-फॉसिल फ्यूल (ग्रीन एनर्जी) स्रोतों से हो रहा है। अर्थात्, देश में 2,35,530 मेगावाट बिजली ग्रीन एनर्जी से उत्पन्न हो रही है।
इसी प्रकार, हरियाणा की कुल स्थापित बिजली क्षमता 16,015 मेगावाट से अधिक है, जिसमें से 6,464 मेगावाट बिजली सौर, पवन, बायोमास, हाइड्रो और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे ग्रीन स्रोतों से प्राप्त हो रही है। यानी हरियाणा अपनी कुल बिजली आवश्यकताओं का लगभग 40 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से पूरा कर रहा है, जो उसे देश के अग्रणी राज्यों में स्थान दिलाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2030 तक 500 गीगावाट (5 लाख मेगावाट) ग्रीन एनर्जी उत्पादन के लक्ष्य को लेकर हरियाणा पूरी तरह समन्वय बनाए हुए है। केंद्र सरकार की नीति है कि 2030 तक देश की कुल बिजली मांग का 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से पूरा किया जाए। इसी दिशा में हरियाणा ने अपनी योजनाएं तैयार की हैं और जहाँ आवश्यकता पड़ रही है, वहाँ नए नियम भी बनाए जा रहे हैं। इससे राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में वृद्धि होगी और पर्यावरण संरक्षण तथा आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।
वर्तमान में हरियाणा के भौगोलिक क्षेत्र में 371.54 मेगावाट सौर ऊर्जा हरियाणा पावर परचेज सेंटर द्वारा खरीदी जा रही है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में 1,59,055 ऑफ-ग्रिड सोलर पंप स्थापित हैं, जिनसे 1,073.6 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है। यह सौर ऊर्जा ग्रिड से नहीं जुड़ी होती, जिसे ‘ऑफ-ग्रिड’ कहा जाता है। इसी प्रकार, एलईडी आधारित एसपीवी होम सिस्टम, सोलर इन्वर्टर चार्जर, सोलर स्ट्रीट लाइट्स, हाई मास्ट लाइट्स, आंगनवाड़ियों हेतु सोलर होम सिस्टम एवं सोलर लैम्प कार्यक्रमों के तहत 23.37 मेगावाट अतिरिक्त ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा उत्पन्न की जा रही है। इससे स्वच्छ ऊर्जा गांव-गांव तक पहुंच रही है।
पीएम-कुसुम योजना के तहत किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा है। रूफटॉप सोलर, सोलर पार्क, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और सरकारी भवनों में चल रहे ऊर्जा दक्षता अभियानों से राज्य में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी निरंतर बढ़ रही है।
हरियाणा की यह पहल न केवल राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्वच्छ बनाती है, बल्कि पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को भी सुदृढ़ करती है।
ग्रीन एनर्जी उत्पादन में भारी निवेश के चलते भारत 2030 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
पर्यावरण संरक्षण और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए भारत पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 2030 तक भारत अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में लगभग 4 अरब टन की कमी करेगा, अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी को 45 प्रतिशत से कम करेगा और वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य प्राप्त करेगा। हरियाणा भी इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाए रखते हुए पूर्ण सहयोग कर रहा है।