देहरादून में एसटीएफ का बड़ा एक्शन: नामी ब्रांड्स के नाम पर नकली दवा बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, सरगना गिरफ्तार
जे कुमार देहरादून (उत्तराखंड), 20 जुलाई 2026: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने प्रदेश में चल रहे नकली दवाइयों के एक बड़े और खतरनाक अंतरराज्यीय कारोबार का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ ने देहरादून के सेलाकुई और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर नकली गोलियां और सीरप बनाने वाले गिरोह के मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह देश की नामी और नामचीन फार्मा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां तैयार कर कई राज्यों में सप्लाई कर रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसटीएफ को खुफिया जानकारी मिली थी कि औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई (देहरादून) और हरिद्वार के इलाकों में अवैध रूप से नामी ब्रांड्स के रैपर और क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल कर नकली दवाएं बनाई जा रही हैं। इसके बाद एसटीएफ एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने सेलाकुई थाने में मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए गिरोह के मुख्य सरगना को राजस्थान से दबोच लिया।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ सहित कई राज्यों में कूरियर और स्थानीय मेडिकल सप्लाई नेटवर्क के जरिए इन जहरीली व असरहीन नकली दवाओं को खपा रहा था। आरोपी सिप्ला, ग्लैनमार्क और डॉ. रेड्डीज जैसी नामी कंपनियों के हूबहू रैपर, पैकेजिंग मैटीरियल और फर्जी क्यूआर कोड प्रिंट करके असली जैसी दिखने वाली नकली गोलियां बाजार में बेचते थे।
पुलिस और एसटीएफ की टीम ने मौके से भारी मात्रा में नकली दवाइयां, कच्चा माल, टैबलेट पंचिंग मशीनें, प्रिंटेड रैपर और पैकेजिंग सामग्री बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के तार अन्य राज्यों के बड़े ड्रग माफियाओं से भी जुड़े हुए हैं। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कॉपीराइट एक्ट और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की संगीन धाराओं में केस दर्ज कर बाकी फरार साथियों की तलाश में अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की जा रही है।
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