27/08/25

कालजयी साहित्य समाज का मार्गदर्शक होता है: डॉ. चंद्र त्रिखा

चंडीगढ़ , 27 अगस्त (अभी) -- हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चंद्र  त्रिखा तथा हिंदी व हरियाणवी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने आज पंचकूला के अकादमी भवन में जाने-माने साहित्यकार एवं यायावर छायाकार डॉ. ओमप्रकाश कादयान द्वारा लिखित पुस्तक 'पुस्तक विमर्श' तथा वरिष्ठ साहित्यकार जयभगवान सैनी की पुस्तक 'सैनिक जीवन: एक संघर्ष गाथा' तथा डॉ. ओमप्रकाश कादयान द्वारा लिखित एवं जयभगवान सैनी द्वारा हरियाणवी में अनुवाद किया गया कहानी संग्रह 'बसंत आण की उम्मीद' का विमोचन किया।

 

 विमोचन के बाद उर्दू अकादमी के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा ने दोनों लेखकों को बधाई दी तथा कहा कि एक अच्छा साहित्यकार समाज का दुख -दर्द अपना दुख- दर्द समझ कर कागज पर उतारता है। हर्ष- उल्लास, समाज के यथार्थ को कालजयी रचनाओं का रूप देकर समाज का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि आजकल साहित्य की करीब हर विधा में खूब लिखा जा रहा है, लेकिन प्रभावशाली व असरदार साहित्य कम लिखा जा रहा है। साहित्यकारों का दायित्व बनता है कि वे जो लिखें, असरदार लिखें ताकि समाज में बेहतरीन बदलाव आ सके।

 

 निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने दोनों लेखकों को बधाई व शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उम्मीद है कि ये पुस्तकें पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य बेहतरीन समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुस्तकें सच्चे मित्र की तरह साथ निभाती हैं तो अनुभवी गुरु की तरह मार्गदर्शन का काम भी करती हैं, जीना सिखाती हैं। उन्होंने कहा कि समाज जब -जब  रास्ता भटकता है तो साहित्यकार ही समाज को सही दिशा देता है, इसलिए साहित्यकार सम्मान का हकदार होता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समाज को जोड़ने का  काम करती हैं, हमें तनावमुक्त करती हैं, हमें ज्ञानवान बनाती हैं।

 

साहित्यकार ओमप्रकाश कादयान व जयभगवान सैनी ने अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताया

 

आज जिन पुस्तकों का विमोचन हुआ है उनमें पुस्तक 'पुस्तक विमर्श' समीक्षा पर केन्द्रित है जबकि 'सैनिक जीवन: एक संघर्ष गाथा'  वीर सैनिकों के जीवन पर आधारित है तथा 'बसंत आण की उम्मीद' में लोक जीवन की यथार्थ कहानियां हैं।

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