मच्छरजनित बीमारियों पर रोकथाम हेतु चंडीगढ़ प्रशासन सख्त; बार-बार लार्वा मिलने पर अब सीधे होगा ₹500 का जुर्माना
अभिकान्त, 05 जुलाई चंडीगढ़ : मानसून के मौसम में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के संभावित प्रसार को रोकने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने नियमों को अत्यंत सख्त कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा समूचे शहर में एक वृहद एंटी-लार्वा अभियान प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। नई व्यवस्था के अनुसार, जिन घरों, व्यावसायिक दुकानों, सेवा केंद्रों अथवा अन्य परिसरों में बार-बार मच्छरों का लार्वा पाया जाएगा, उनके स्वामियों के खिलाफ विभाग द्वारा अब सीधे जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जनता को जागरूक करने के पर्याप्त प्रयासों के उपरांत अब नियमों का कड़ाई से पालन करवाना अत्यंत आवश्यक हो गया है, ताकि मच्छरों की उत्पत्ति और उनकी बढ़ती संख्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की इस नई योजना के अंतर्गत निरीक्षण और चालान की संपूर्ण प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया गया है। प्रथम चरण के तहत किसी परिसर में पहली बार लार्वा मिलने पर संबंधित व्यक्ति को सचेत करते हुए एक आधिकारिक नोटिस जारी किया जाएगा। इसके उपरांत, द्वितीय चरण में यदि दोबारा उसी परिसर में मच्छरों का लार्वा पाया जाता है, तो विभाग द्वारा मौके पर ही ₹500 का चालान काटा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बरसात के मौसम में घरों और आसपास पानी जमा होने से मच्छरों की ब्रीडिंग अत्यधिक तीव्र गति से होती है। विशेषकर कूलरों, गमलों, पुराने टायरों, कबाड़ और खुले बर्तनों में संचित जल डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के पनपने का मुख्य स्रोत बनता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए शहर के सभी सेक्टरों और वार्डों में स्वास्थ्य टीमों द्वारा नियमित निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।
प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए नागरिकों से भी विशेष सावधानी बरतने का आह्वान किया है। जनता से अपील की गई है कि वे सप्ताह में एक दिन अनिवार्य रूप से 'ड्राई डे' मनाते हुए अपने कूलरों का पानी पूरी तरह खाली करें। इसके अतिरिक्त, छतों और आंगनों में रखे पुराने टायरों, टूटे बर्तनों और गमलों में जलभराव न होने दें तथा पानी की टंकियों को हमेशा ढक्कन से अच्छी तरह बंद रखें। विभाग का मानना है कि जनभागीदारी और पूर्ण सहयोग के माध्यम से ही डेंगू व मलेरिया जैसी घातक बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
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