संत रविदास आध्यात्मिक गुरू व सामाजिक समरसता के प्रेरणापुंज थे - केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेन्द्र यादव

राजस्थान, 12 फरवरी (अभी) : केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव एवं पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने बुधवार को अलवर जिले में राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संघ द्वारा आयोजित संत रविदास की 648वीं जयन्ती कार्यक्रम में शिरकत कर संत रविदास के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर कहा कि संत रविदास के संदेश देश को समरसता के साथ विकास के पथ पर ले जाने वाले हैं।

 केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने संत रविदास को नमन करते हुए कहा कि भारत संतों का देश रहा है। इसी परम्परा में परमज्ञानी संत रविदास ने 13वीं शताब्दी में अपने जीवन मूल्यों से समाज को समरसता, नैतिकता व मानवता का संदेश दिए। समाज व देश के नैतिक मूल्यों को मजबूत करने हेतु उनके दिए गए संदेशों को हम सबको आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत रविदास के संदेशों को विकास व सामाजिक समरसता का आधार मानकर बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के द्वारा बनाए गए संविधान के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि उनके संदेशों को युवा पीढी से रूबरू कराने व उनसे प्रेरणा लेकर सामाजिक सद्भाव में हम सबको भूमिका निभानी चाहिए। 

पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री श्री संजय शर्मा ने संत रविदास को श्रद्धा सुमन अर्पित कर कहा कि 13वीं सदी में समाज में व्याप्त भेदभाव जैसी कुप्रथाओं को दूर की समाज को दिशा दी।  उन्होंने कहा कि जिले में सबके लिए आधुनिक डिजिटल शिक्षा के अवसर प्रदान करने की दिशा में काम कर रहे हैं जिसके तहत उन्होंने सांसद निधि कोष से 55 डिजिटल लाइब्रेरी बनवा दी है तथा 110 लाइब्रेरियों का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि जाटव समाज द्वारा जब उनके सामने बालिकाओं के छात्रावास के लिए भूमि आवंटन का विषय रखा तो उन्होंने इस पर त्वरित कार्यवाही कराते हुए यूआईटी के द्वारा भूमि आवंटन का प्रस्ताव राज्य सरकार को भिजवा दिया गया है। यथाशीघ्र रियायती दरों पर बेटियों के छात्रावास की भूमि आवंटित हो जावेगी। 

राजस्थान अम्बेडकर शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री रामचरण वर्मा ने आगन्तुकों का आभार जताया। इस दौरान रामगढ विधायक श्री सुखवंत सिंह, अलवर जिला अध्यक्ष श्री अशोक गुप्ता सहित अनेक प्रबुद्ध व्यक्ति मौजूद रहे। 

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