अम्बाला उपायुक्त अजय सिंह तोमर  ने नाबार्ड द्वारा समर्थित ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी का किया दौरा

अम्बाला, 13 फरवरी (अभी): उपायुक्त अंबाला श्री अजय सिंह तोमर ने विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का दौरा किया। इस दौरे के दौरान उपायुक्त ने भुरेवाला स्थित श्री स्वामी रामा फाउंडेशन ट्रस्ट प्रांगण में विरासत के कॉमन फैसिलिटी सेंटर एवं बड़ा गांव में बुनकरों के घरों में जाकर उनकी कार्यशैली को समझा। दरी आदि बनाने के कार्य का अवलोकन करते हुए बुनकरों से बातचीत करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। इससे पूर्व यहां पहुंचने पर नाबार्ड के अम्बाला कल्स्टर के डीडीएम पुष्पेन्द्र कुमार, श्री स्वामी रामा फाउंडेशन ट्रस्ट की उपाध्यक्ष रेखा वोहरा ने उपायुक्त एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर श्रीमती रेखा वोहरा ने बताया कि श्री स्वामी राम फाउंडेशन ट्रस्ट एक गैर-लाभकारी स्वैच्छिक संगठन है, जो हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, व्यावसायिक प्रशिक्षण और आय सृजन के लिए कार्य कर रहा है।
उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने सुझाव दिया कि
विरासत के सभी उत्पादों पर टैग, लॉगो एवं उत्पाद संबंधी जानकारी अनिवार्य रूप से लगाई जाए। जेम पोर्टल, गीता जयंती, योगा डे एवं स्थानीय मेलों के लिए ओएफपीओ के सभी उत्पादों की ई-कैटलॉग तैयार की जाए, जिसमें मूल्य एवं अन्य जानकारी उपलब्ध हो।
उपायुक्त ने कहा कि दरी बुनाई इस क्लस्टर का पुश्तैनी व्यवसाय रहा है, जो अब विलुप्ति की कगार पर था। नाबार्ड द्वारा अनुदानित इस ओएफपीओ विरासत ने 310 बुनकरों को एकजुट कर उन्हें एक कंपनी का मालिक बना दिया है। उन्होंने इस परियोजना को स्थानीय अर्थव्यवस्था और मेक इन इंडिया पहल के लिए महत्वपूर्ण बताया।
यह परियोजना न केवल अंबाला और पंचकूला बल्कि पूरे हरियाणा में एक मिसाल बनेगी। उपायुक्त ने ओएफपीओ विरासत के प्रयासों की सराहना की और सभी बुनकरों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। इस परियोजना से स्थानीय हस्तशिल्प को बढावा मिलेगा।
नाबार्ड का सहयोग
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक/नाबार्ड ने इस परियोजना के लिए तीन वर्षों के लिए 74 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है।
श्री स्वामी रामा फाउंडेशन ट्रस्ट, ऑफ  फार्म प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन /ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स का कार्यान्वयन एजेंसी है, जिसका उद्देश्य पंचकूला और अम्बाला जिले के सात गांवों रायपुररानी, गढ़ी कोटाहा, समलेहरी, हरयोली,  शाहपुर, खेड़ी और बड़ा गांव के 310 दरी बुनकरों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को पुनर्जीवित करना है।
परियोजना की उपलब्धियाँ
सभी बुनकरों को पहचान पत्र/विवर्स कार्ड वितरित किए गए हैं।
विरासत की ब्रांडिंग का कार्य नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ  फैशन टेक्नोलॉजी/एनआईएफटी पंचकूला द्वारा किया गया है। इसमें लॉगो डिजाइन, सोशल मीडिया प्रमोशन, इंस्टाग्राम, फेसबुक, कैट लॉग, ब्रोशर और ई.कॉमर्स गतिविधियां शामिल हैं। विरासत के उत्पाद अमेजन, एग्जॉटिक इण्डिया, ओएनडीसी, अमनी जैसी ई.कॉमर्स साइट्स पर उपलब्ध हैं।
इस कंपनी को एमएसएमई के उद्यम पोर्टल पर भी पंजीकृत किया गया है। बुनकरों को समर्थ प्रशिक्षण योजना के तहत मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स के सेवा केंद्र पानीपत से जोड़ा गया है।
ट्रेनिंग प्राप्त करने वाली महिलाओं को मात्र 10 प्रतिशत राशि का भुगतान कर 21 लूम्स (लगभग 9 लाख रुपये मूल्य) मिनिस्ट्री ऑफ टेक्सटाइल्स के हैंडलूम विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। इस अवसर पर एसएमई से संयुक्त निदेशक रितुल सिंघला, केवाईसी परामर्शदाता डॉ. अमित चौपड़ा, डीसीसीबी जीएम पंचकूला संजीव चौहान, बीडीपीओ जोगेश कुमार तथा सरपंच प्रतिनिधी भूरेवाला सतीश कुमार भी मौजूद रहे।
फोटो-1/2 उपायुक्त अजय सिंह तोमर गांव भूरेवाला में नाबार्ड द्वारा समर्थित ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में बुनकरों द्वारा तैयार की गई दरी का अवलोकन करते हुए।
फोटो- 4 उपायुक्त अजय सिंह तोमर गांव भूरेवाला में नाबार्ड द्वारा समर्थित ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में बुनकरों  व अन्य लोगों के साथ।
फोटो-5 उपायुक्त अजय सिंह तोमर को ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में श्री स्वामी रामा फाउंडेशन ट्रस्ट की उपाध्यक्ष रेखा वोहरा पौधा देकर स्वागत करते हुए।
फोटो-6 उपायुक्त अजय सिंह तोमर को ओएफपीओ विरासत बैक टू रूट्स हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के कॉमन फैसिलिटी सेंटर में अंग वस्त्र पहनाकर स्वागत करते हुए केवाईसी परामर्शदाता डॉ. अमित चौपड़ा।

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