एनएचआरसी, भारत ने ‘व्यक्तियों की गरिमा और स्वतंत्रता - मैनुअल स्कैवेंजर्स के अधिकार’ पर खुली चर्चा का आयोजन किया

आरएस अनेजा, 06 जनवरी नई दिल्ली

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने नई दिल्ली में अपने परिसर में ‘व्यक्तियों की गरिमा और स्वतंत्रता- मैनुअल स्कैवेंजरों के अधिकार’ विषय पर हाइब्रिड मोड में एक ओपन हाउस चर्चा का आयोजन किया। इस चर्चा की अध्यक्षता एनएचआरसी, भारत के अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री वी. रामसुब्रमण्यन ने सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी और न्यायमूर्ति (डॉ) बिद्युत रंजन सारंगी, महासचिव श्री भरत लाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में की। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों, गैर सरकारी संगठनों, मानवाधिकार रक्षकों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, निजी संगठनों और शोध विद्वानों के प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने मैनुअल स्कैवेंजरों के अधिकारों और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने से संबंधित प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा में योगदान दिया।

एनएचआरसी, भारत के अध्यक्ष ने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक ऐसा क्षेत्र है जिसे विधायी रूप से निपटाया जा रहा है, कार्यकारी रूप से प्रबंधित किया जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए न्यायिक रूप से निगरानी की जा रही है। हालांकि, यह चिंताजनक है कि सीवेज और खतरनाक कचरे की मैनुअल सफाई को खत्म करने के कानूनी प्रावधानों के बावजूद सफाई कर्मचारियों की मौतें अभी भी हो रही हैं।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम ने कहा कि उपचारात्मक उपाय सुझाने के लिए कारणों का अध्ययन और समझना आवश्यक है। उन्होंने सीवर लाइनों और सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए प्रौद्योगिकी/रोबोट का उपयोग करके एक पायलट परियोजना चलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिसकी शुरुआत एक राज्य से की जानी चाहिए ताकि इसके परिणाम देखे जा सकें और देश के अन्य हिस्सों में भी इसका अनुकरण किया जा सके।

इससे पहले, चर्चा का एजेंडा तय करते हुए, एनएचआरसी, भारत के महासचिव, श्री भरत लाल ने कहा कि आयोग ने विभिन्न राज्यों द्वारा मशीनीकृत सफाई प्रक्रियाओं के कार्यान्वयन और इस संबंध में उनके द्वारा उठाए गए कदमों के मुद्दे को उठाया है। यह सामने आया है कि विभिन्न राज्यों ने डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ और अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी शहरी स्थानीय निकायों के लिए तीन साल का कार्यक्रम तैयार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कुछ जातियां और समुदाय इस प्रथा से असमान रूप से प्रभावित हैं।

इससे पहले, एनएचआरसी, भारत के संयुक्त सचिव, श्री देवेंद्र कुमार निम ने तीन तकनीकी सत्रों का अवलोकन किया- ‘भारत में सेप्टिक और वेअर टैंकों में होने वाली मौतों के मुद्दे को संबोधित करना’, ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग पर पूर्ण प्रतिबंध की आवश्यकता’, और ‘मैनुअल स्कैवेंजरों के लिए पुनर्वास उपाय: सम्मान और सशक्तीकरण की दिशा में एक रास्ता और आगे का रास्ता।’ उन्होंने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसे सामूहिक प्रयासों से संबोधित करने की आवश्यकता है। वक्ताओं में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री प्रभात कुमार सिंह, सफाई कर्मचारी आंदोलन, नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक श्री बेजवाड़ा विल्सन, यूनिसेफ इंडिया के वरिष्ठ वाश विशेषज्ञ श्री सुजॉय मजूमदार, यूनिसेफ भारत के जल स्वच्छता और स्वास्थ्य विशेषज्ञ श्री यूसुफ कबीर, सीपीएचईईओ रोहित कक्कड़, जेनरोबोटिक्स इनोवेशन, केरल के निदेशक श्री राशिद करिंबनक्कल, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की बैशाली लाहिड़ी, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में मानवाधिकार और सबाल्टर्न अध्ययन केंद्र के विधि एवं निदेशक डॉ. विनोद कुमार, वेव फाउंडेशन की मंजुला प्रदीप, तमिलनाडु की सोलिनास इंटीग्रिटी प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री राज कुमारी, पुणे की फ्लेम यूनिवर्सिटी की प्रो. शीवा दुबे, काम-एविडा एनवायरो इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री एम. कृष्णा आदि मौजूद रहे।

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