पहले लोकपाल स्थापना दिवस समारोह का आयोजन

आरएस अनेजा, 17 जनवरी नई दिल्ली

भारत के लोकपाल का पहला स्थापना दिवस समारोह 16 जनवरी को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में भारत के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री संजीव खन्ना की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया ।

आज ही के दिन 16 जनवरी,2014 को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 3 के लागू होने के साथ भारत के लोकपाल की स्थापना हुई थी।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े, पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय और पूर्व लोकायुक्त, कर्नाटक, पद्म भूषण अन्ना हजारे, आर. वेंकटरमणी, भारत के अटॉर्नी जनरल, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, राज्यों के लोकायुक्त, भारत के लोकपाल के पूर्व और वर्तमान सदस्य , बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन और दिल्ली बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, दिल्ली न्यायपालिका के प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश शामिल थे।

पद्म भूषण अन्ना हजारे वर्चुअल माध्यम से स्मरणोत्सव में सम्मिलित हुए

इस अवसर पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक(सीएजी),केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सीवीओ जैसे विभिन्न संगठनों के अधिकारी भी उपस्थित थे।

समारोह की शुरुआत न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना के स्वागत के साथ हुई। मुख्य अतिथि, गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए लोकपाल सदस्य न्यायमूर्ति लिंगप्पा नारायण स्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि  "यह अवसर न केवल चिंतन के दिन के रूप में बल्कि हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के रूप में भी उल्लेखनीय महत्व रखता है।"

लोकपाल के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर ने अपने संबोधन में, स्पष्ट किया कि लोकपाल का उदय “भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल की मांग करने वाले परिवर्तनकारी नागरिक समाज आंदोलन से उत्पन्न हुआ एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है”। उन्होंने कहा - “यह दिन, 16 जनवरी, केवल स्वायत्त, स्वतंत्र और अद्वितीय संस्था के रूप में लोकपाल की स्थापना का उत्सव नहीं है। यह हमारे लोकतंत्र की नींव रखने वाले मूल मूल्यों के प्रति सभी समान विचारधारा वाले लोगों की दृढ़ प्रतिबद्धता और हर स्तर पर भ्रष्टाचार मुक्त शासन का समर्थन करने के बारे में भी है।” इस बात पर जोर देते हुए कि “सार्वजनिक कार्यालयों में भ्रष्टाचार के उन्मूलन के चल रहे मिशन में लोकपाल एक महत्वपूर्ण साधन है, न्यायमूर्ति खानविलकर ने रेखांकित किया कि “लोकपाल के सामने चुनौतियाँ लगातार विकसित हो रही हैं। क्योंकि भ्रष्टाचार का प्रतिमान विकसित हो रहा है। राजनेताओं, नौकरशाहों और व्यापारिक हितों के बीच गठजोड़ और भी मजबूत हो गया है। इसके लिए निरंतर सतर्कता और समय पर और प्रभावी सफाई प्रणाली की आवश्यकता है।”

लोकपाल की कार्यप्रणाली के बारे में अपने दृष्टिकोण के बारे में बोलते हुए न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपने भाषण में कहा कि लोकपाल की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए बहुआयामी रणनीतियां तैयार की गई हैं। जैसे, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सरल बनाना और इसे हितधारकों के अनुकूल बनाना, प्रक्रियाओं की दक्षता और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और प्रणालियों का एकीकरण, कुशल डेटा प्रबंधन और विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुप्रयोगों का उपयोग करना, भ्रष्टाचार की बढ़ती जटिल प्रकृति से निपटने के लिए फोरेंसिक अकाउंटिंग और साइबर जांच सहित विशेष विशेषज्ञता वाले कर्मियों की भर्ती को प्राथमिकता देना, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक सुसंगत और एकजुट मोर्चा बनाने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (सीबीआई), सतर्कता आयोगों (सीवीसी और सीवीओ), अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका के साथ बढ़ते सहयोग का प्रचार करना।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने जागरूक जनता के महत्व को स्वीकार करते हुए आगे कहा कि "हमारा मानना ​​है कि एक ऐसा समाज जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है और उन्हें संरक्षण प्रदान करने वाली संस्थाओं तक सरलता से पहुंच प्राप्त करता है, वह एक ऐसा वातावरण बनाने की दिशा में एक कदम आगे है जो भ्रष्टाचार को सहन नहीं करेगा"।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का आश्वासन देते हुए अध्यक्ष ने आश्वत दिया कि लोकपाल अपनी पहुंच का विस्तार, कार्यप्रणाली में सुधार तथा संस्था में जनता का विश्वास सशक्त करना जारी रखेगा।

इसके बाद मुख्य अतिथि द्वारा न्यायमूर्ति एन. संतोष हेगड़े और आर वेंकटरमणी को सम्मानित किया गया। जबकि पद्म भूषण श्री अन्ना हजारे को रालेगांव सिद्धि में भारत के लोकपाल के अवर सचिव श्री बिनोद कुमार ने मुख्य अतिथि की ओर से सम्मानित किया।

न्यायमूर्ति श्री संजीव खन्ना ने हाल के समय में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़े जनांदोलनों में से एक का नेतृत्व करने में पद्म भूषण अन्ना हजारे के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि लोकपाल हमारे लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को कायम रखता है - कि सत्ता का प्रयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए और सरकार को नैतिकता, उत्तरदायिता और पारदर्शिता का पालन करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि लोकपाल हमारी संवैधानिक योजना के लिए सर्वोपरि है क्योंकि यह भ्रष्टाचार के जहर का प्रतिकार करता है, एक ऐसा खतरा जिसने दुनिया भर के लोकतंत्रों को ग्रसित कर रखा है।

Previous
Previous

प्राकृतिक खेती से होगा धरती की गुणवत्ता में सुधार- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा

Next
Next

इरेडा, एसजेवीएन, जीएमआर और एनईए ने नेपाल में 900 मेगावाट अपर कर्णाली जलविद्युत परियोजना के लिए साझेदारी को अंतिम रूप दिया