प्रयागराज में महाकुंभ 2025 आध्यात्मिकता और नवीनता का अनूठा संगम होगा

आरएस अनेजा, नई दिल्ली 31 दिसम्बर।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ 2025 आध्यात्मिकता और नवीनता का अनूठा संगम होगा, जहां अत्याधुनिक डिजिटल प्रगति साथ सनातन धर्म की पवित्र परंपराएं नजर आएंगी। दुनिया भर के लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र यह प्रतिष्ठित उत्सव, इसमें शामिल होने वाले सभी लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक को अपना रहा है। उच्च तकनीक सुरक्षा उपायों से लेकर डिजिटल भूमि आवंटन और स्थिर वर्चुअल रियलिटी अनुभवों सहित महाकुंभ 2025, भक्तों के विश्वास और आयोजन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को नए तरीके से परिभाषित कर रहा है। बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी व्यापक तैयारियों के साथ, महाकुंभ परंपरा और तकनीक के बीच सामंजस्य का मॉडल बनने के लिए तैयार है।

महाकुंभ में साइबर सुरक्षा

दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष साइबर सुरक्षा व्यवस्था शुरू की गई है। इनमें साइबर गश्त के लिए 56 समर्पित साइबर योद्धाओं और विशेषज्ञों की तैनाती, धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों, सोशल मीडिया घोटालों और फर्जी लिंक जैसे साइबर खतरों से निपटने के लिए महाकुंभ साइबर पुलिस स्टेशन की स्थापना, साइबर खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मेला क्षेत्र और कमिश्नरी दोनों में 40 वैरिएबल मैसेजिंग डिस्प्ले (वीएमडी) स्थापित किए जाएंगे। इसी प्रकार हेल्पलाइन नंबर 1920 और सत्यापित सरकारी वेबसाइटों को बढ़ावा देना

महाकुंभ नगरी में करीब 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को पूरी जानकारी देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रिंट, डिजिटल और सोशल मीडिया समेत हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। साइबर विशेषज्ञ ऑनलाइन खतरों पर सक्रिय रूप से नजर रख रहे हैं और एआई, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का फायदा उठाने वाले गिरोहों की जांच कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर जन जागरूकता अभियान के लिए मोबाइल साइबर टीम भी तैनात की गई है। फिलहाल, राज्य के विशेषज्ञों की टीम ने करीब 50 संदिग्ध वेबसाइटों की पहचान की है और उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।

बुनियादी ढांचा और भूमि डिजिटलीकरण

उत्तर प्रदेश का सबसे नया जिला महाकुंभ नगर रिकॉर्ड समय में अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ बनाया जा रहा है। "महाकुंभ भूमि एवं सुविधा आवंटन" साइट के माध्यम से भूमि एवं सुविधाओं की ऑनलाइन उपलब्धता। सरकारी, सामाजिक और धार्मिक संगठनों सहित 10,000 से अधिक संस्थाओं के रिकार्डों का डिजिटलीकरण। उच्च सटीकता के साथ भूमि स्थलाकृति का मानचित्रण करने के लिए मॉनसून से पहले और बाद में ड्रोन सर्वेक्षण किए गए। आवेदनों का व्यापक डेटा डिजिटलीकरण और आवेदन की स्थिति तथा आवंटन की लाइव ट्रैकिंग। सुविधा पर्चियों के माध्यम से समय पर सुविधा स्थापना के लिए विक्रेताओं और सरकारी विभागों के बीच स्वचालित डेटा प्रवाह। प्रयागराज मेला प्राधिकरण अनुकूलित एमआईएस रिपोर्ट और संस्थान-व्यापी विश्लेषण की मदद से बिना लंबी कतारों और निजी रूप से मिले बिना समय पर भूमि और सुविधा आवंटन का काम पूरा करने में सक्षम हैं। गूगल मैप्स पर सहज नेविगेशन के लिए आवश्यक जनता की सुविधा के लिए जीआईएस आधारित मानचित्र उपलब्ध हैं। इनमें आपातकालीन सेवाएं, पुलिस स्टेशन, चौकियां, कमांड और कंट्रोल सेंटर, अस्पताल, पार्किंग क्षेत्र, फूड कोर्ट, वेंडिंग जोन, शौचालय, पंटून पुल, सड़कें आदि शामिल हैं। इस पारदर्शी व्यवस्था से साधु-संतों और संस्थाओं का काम बिना कतार में लगे आसानी से और तेजी से हो रहा है।

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