दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा दें युवा और अभिभावक : दहेज निषेध अधिकारी
जे कुमार पलवल, 29 अप्रैल 2026: दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। पलवल के एसडीएम एवं दहेज निषेध अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने 'दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961' के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कानून महिलाओं के लिए एक सुरक्षा कवच है और इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
दहेज कानून: सख्त सजा और भारी जुर्माना
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि विवाह से पहले, दौरान या बाद में किसी भी प्रकार की संपत्ति, नकदी या आभूषण की मांग करना दंडनीय है। कानून के तहत मुख्य धाराएं इस प्रकार हैं:
धारा 3 (लेन-देन पर सजा): दहेज लेने या देने पर कम से कम 5 साल की कैद और 15,000 रुपये या दहेज की कीमत (जो भी अधिक हो) के बराबर जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 4 (दहेज की मांग): केवल दहेज की मांग करने पर भी 6 महीने से 5 साल तक की सजा और 15,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 8 (गैर-जमानती अपराध): दहेज से जुड़े अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में आते हैं, यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
समाज की सोच में बदलाव जरूरी
एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने युवाओं और अभिभावकों से अपील की कि वे इस कुप्रथा के खिलाफ खड़े हों। उन्होंने कहा कि केवल कानून बना देने से यह प्रथा समाप्त नहीं होगी, इसके लिए सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
"दहेज मुक्त विवाह न केवल कानून का सम्मान है, बल्कि एक स्वस्थ और गरिमापूर्ण समाज की नींव भी है। उत्पीड़न की स्थिति में पीड़ित तुरंत प्रशासन या पुलिस से संपर्क करें।"
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार इस अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है ताकि महिलाओं को हिंसा और शोषण से बचाया जा सके।
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