25/05/26

करोड़ों की घोषणाओं के बाद भी बदहाली के आंसू रो रहा यमुनानगर का तेजली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

जे कुमार यमुनानगर/अम्बाला, 25 मई 2026: हरियाणा को देश का 'खेल हब' कहा जाता है, जहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करते हैं। लेकिन इसी राज्य के यमुनानगर जिले में स्थित तेजली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का एक जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। कभी इस परिसर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल परिसर बनाने के बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, करोड़ों रुपये के बजट और घोषणाओं की झड़ी लगी थी, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद स्याह और निराशाजनक है। यहाँ खिलाड़ियों को मैदान पर पसीना बहाने से ज्यादा व्यवस्था की कमियों से लड़ना पड़ रहा है।

VO: ग्राउंड पर गंदगी का अंबार, महिला खिलाड़ियों के लिए शौचालय तक नहीं

तेजली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में रोजाना सुबह-शाम सैकड़ों की संख्या में देश का भविष्य और युवा खिलाड़ी प्रैक्टिस करने पहुंचते हैं। कोई भारतीय सेना (Army) में भर्ती होने का सपना संजोए है, तो कोई पुलिस भर्ती के लिए कड़कड़ाती धूप में पसीना बहा रहा है। लेकिन इन होनहारों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं:

  • चारों तरफ गंदगी: खेल परिसर के भीतर जगह-जगह कूड़े और गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।

  • जर्जर इनडोर स्टेडियम: इनडोर स्टेडियम की हालत इतनी खस्ता है कि दीवारें टूट रही हैं और खिलाड़ियों के लिए अंदर का वातावरण बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है।

  • सुरक्षा और सम्मान से समझौता: सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि यहाँ महिला खिलाड़ियों के लिए उचित शौचालय (Toilets) और चेंजिंग रूम तक की व्यवस्था नहीं है। अभ्यास के लिए आने वाली बेटियों को भारी मानसिक और शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ता है।

90 करोड़ रुपये का बजट दावों में गुम; कई खेलों के कोच ही गायब

स्थानीय निवासियों और खिलाड़ियों के अनुसार, पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान तेजली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का कायाकल्प करने और इसे पूरी तरह आधुनिक रूप देने के लिए करीब 90 करोड़ रुपये की ग्रांट की घोषणा की गई थी। लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं हिली। बजट तो दूर, इस खेल परिसर में कई महत्वपूर्ण खेलों के स्थायी कोच (Coaches) तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में लटका हुआ है।

बाइट — स्थानीय निवासी: "करोड़ों की घोषणाएं सिर्फ अखबारों और कागजों तक सीमित हैं। हमारे बच्चे यहाँ देश के लिए मेडल जीतने की तैयारी करने आते हैं, लेकिन यहाँ पीने के साफ पानी तक के लाले हैं। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।" बाइट — स्थानीय निवासी: "इनडोर स्टेडियम और ग्राउंड की हालत देखकर रोना आता है। अगर सरकार सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे सकती, तो खेलो इंडिया और बड़े-बड़े दावों का क्या फायदा?"

1995 में खुली उम्मीद की किरण अब बन चुकी है 'जंगल और स्टोर रूम'

इस खेल परिसर की बर्बादी की दास्तान काफी पुरानी है। आज से ठीक तीन दशक पहले, 5 जून 1995 को 'तेजली कॉलेज ऑफ स्पोर्ट्स' के भव्य एडमिन ब्लॉक का उद्घाटन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि यह उत्तर भारत का एक बड़ा खेल संस्थान बनेगा।

  • कॉलेज बंद, भवन स्टोर रूम: योजनाएं फ्लॉप रहीं और स्पोर्ट्स कॉलेज कभी शुरू ही नहीं हो पाया। बाद में इस शानदार भवन का उपयोग जिला खेल अधिकारी कार्यालय (DSO Office) के रूप में किया जाने लगा।

  • चारों तरफ उगा जंगल: अब तो यह ऐतिहासिक प्रशासनिक भवन महज एक कबाड़खाना और स्टोर रूम बनकर रह गया है। भवन के चारों तरफ इतना घना जंगल और झाड़ियाँ उग आई हैं कि किसी भी आम इंसान या खिलाड़ी का वहां तक पैर रखना भी दूभर और खतरनाक हो चुका है।

जल्द काम शुरू होने की उम्मीद, कोच की कमी के लिए सरकार को लिखा: डीएसओ शिल्पा गुप्ता

इस पूरे मामले और व्यवस्था पर जब यमुनानगर की जिला खेल अधिकारी (DSO) शिल्पा गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने माना कि व्यवस्थाओं में कुछ कमियां जरूर हैं।

बाइट — शिल्पा गुप्ता (जिला खेल अधिकारी): "सरकार की ओर से जो ग्रांट घोषित की गई थी, उसकी प्रशासनिक प्रक्रिया अभी जारी है और हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। वर्तमान में यहाँ 10 कोच मुस्तैदी से काम कर रहे हैं और परिसर में वेटलिफ्टिंग व फुटबॉल अकादमी सफलतापूर्वक चलाई जा रही है। यह सच है कि कुछ मुख्य खेलों के कोचों की कमी है, जिसके बारे में हमने उच्च अधिकारियों और सरकार को लिखित में मांग भेजी हुई है।"

LVO: खिलाड़ियों के भविष्य के साथ कब तक होगा खिलवाड़?

तेजली स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की यह बदहाल और जर्जर तस्वीरें खेल नीति पर कई बड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं। एक तरफ जहां सरकार खिलाड़ियों को मेडल लाने पर करोड़ों के इनाम बांटती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरसना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि खेल विभाग की नींद कब टूटती है और यमुनानगर की इस खेल नर्सरी को कब अपने नाम के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय सुविधाएं मिल पाती हैं।

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