मोहाली में 7 लाख का किडनी ट्रांसप्लांट फेल: मां की दी हुई किडनी भी हुई खराब; इलाज के लिए जमीन बेची
चंडीगढ़, 17 अगस्त (अन्नू): एक मां ने जिस बेटे को जन्म दिया, उसकी जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी भी दान कर दी। लेकिन मोहाली के एक निजी अस्पताल में हुए ट्रांसप्लांट के बाद भी किस्मत ने साथ नहीं दिया और प्रत्यारोपित किडनी फेल हो गई। यह दर्दनाक कहानी उत्तर प्रदेश के बिजनौर (नजीबाबाद) निवासी 32 वर्षीय अल्ताफ की है, जो अब चंडीगढ़ PGI के बाहर अपने पिता के साथ इलाज की आस में दिन काट रहा है।
अबू धाबी में ड्राइवर था अल्ताफ; पैर में दर्द से सामने आई बीमारी
5 साल विदेश में की नौकरी: अल्ताफ करीब 5 साल तक अबू धाबी में बतौर ड्राइवर काम करता था, जहां वह 20 से 25 हजार रुपए महीना कमाता था।
अचानक बिगड़ी तबीयत: एक दिन अचानक उसके पैर में तेज दर्द और सूजन की शिकायत हुई। अबू धाबी में शुरुआती इलाज के बाद परिवार उसे भारत ले आया। बिजनौर में जांच कराने पर पता चला कि उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी हैं।
मां ने किया अंगदान: बेटे की जान बचाने के लिए मां शेरूनिका ने अपनी किडनी देने का फैसला किया, हालांकि ट्रांसप्लांट से पहले उनकी किडनी में पथरी की समस्या भी बताई गई थी।
अक्टूबर 2025 में हुआ ट्रांसप्लांट; कुछ समय बाद फिर बिगड़ी हालत
मोहाली अस्पताल में ट्रांसप्लांट: अक्टूबर 2025 में मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल में करीब 7 लाख रुपए खर्च करके अल्ताफ का किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया।
फेल हुई किडनी: ट्रांसप्लांट के बाद परिवार को लगा कि अल्ताफ ठीक हो जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद उसकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी और डॉक्टरों ने बताया कि नई किडनी भी फेल हो चुकी है।
बोलने की क्षमता खोई: बीमारी और शारीरिक परेशानी के कारण अल्ताफ अब बोल भी नहीं पाता है। परिवार केवल उसके इशारों और हालत को देखकर उसकी जरूरतों को समझता है।
PGI में भर्ती कराया; जमीन बेचकर जुटाए 9.5 लाख रुपए
PGI चंडीगढ़ के चक्कर: हालत ज्यादा बिगड़ने पर जुलाई 2026 में परिवार उसे चंडीगढ़ PGI लेकर आया, जहां वह 8 दिन भर्ती रहा।
जमीन बेचने पर मजबूर हुआ परिवार: इलाज और ट्रांसप्लांट में अब तक परिवार के 9.5 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। मजबूरी में परिवार को अपनी एक बीघा जमीन तक बेचनी पड़ी।
महंगे डायलिसिस का बोझ: परिवार अब हर तीसरे दिन डायलिसिस के लिए PGI पहुंचता है, जहां ₹500 में सस्ता डायलिसिस होता है। लेकिन PGI में नंबर न आने पर उन्हें बाहर के प्राइवेट सेंटरों से ₹3,000 प्रति डायलिसिस खर्च करने पड़ते हैं।
किडनी दान करने वाली मां की सेहत भी चिंताजनक
पेट दर्द और बुखार से पीड़ित: बेटे को अपनी किडनी देने के बाद मां शेरूनिका की तबीयत भी लगातार बिगड़ रही है। उन्हें अक्सर पेट में दर्द और तेज बुखार रहता है।
पिता पर दोहरी जिम्मेदारी: अल्ताफ के पिता शाहिद अब एक तरफ बीमार बेटे और दूसरी तरफ अपनी पत्नी दोनों की देखभाल और इलाज के खर्च का इंतजाम अकेले संभाल रहे हैं।
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