18/04/25

विश्व धरोहर दिवस आज, देशभर के एएसआई स्मारकों में प्रवेश शुल्क नहीं लगेगा

आरएस अनेजा, 18 अप्रैल नई दिल्ली

आज विश्व धरोहर दिवस है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह घोषणा करते हुए खुशी जताई कि 18 अप्रैल को विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले 'अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस' के अवसर पर देश भर में एएसआई स्मारकों को देखने जाने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखने के लिए प्रोत्साहित करना है। एएसआई अपने संरक्षण में 3,698 स्मारकों और स्थलों के साथ देश की ऐतिहासिक विरासत और वास्तुशिल्प चमत्कारों से फिर से जुड़ने का यह अवसर प्रदान कर रहा है।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस का विषय है 'आपदा एवं संघर्ष से खतरे में धरोहर'। इसके तहत प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं, खतरों या संघर्षों से धरोहर स्थलों की सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही है।

प्रवेश शुल्क माफ करने से एएसआई को उम्मीद है कि हमारी निर्मित विरासत के संरक्षण और प्रबंधन के महत्व के बारे में अधिक से अधिक जन सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा और इस बात पर जागरूकता बढ़ेगी कि नागरिक किस प्रकार हमारी विरासत को संरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

आखिरकार, हमारे संविधान में निर्धारित मौलिक कर्तव्यों के अनुसार, इन अमूल्य विरासत स्थलों की रक्षा करना और उन्हें बचाने में अपना योगदान देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

विश्व धरोहर दिवस का इतिहास

पहली बार 1968 में एक अंतरराष्ट्रीय संगठन ने विश्व की सभी प्रसिद्ध इमारतों और प्राकृतिक स्थलों की सुरक्षा का प्रस्ताव रखा था, जिसे स्टाॅकहोम में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पारित किया गया। बाद में जब यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर की स्थापना हुई तो 18 अप्रैल 1978 में विश्व स्मारक दिवस मनाने की शुरुआत की गई। तब सिर्फ 12 स्थलों को ही विश्व स्मारक स्थलों की सूची में शामिल किया गया था।

पहली बार कब मनाया गया धरोहर दिवस

चार साल बाद 18 अप्रैल 1982 को ट्यूनीशिया में 'इंटरनेशनल काउंसिल आफ मोनुमेंट्स एंड साइट्स' ने सबसे पहले विश्व धरोहर दिवस मनाया। एक साल बाद 1983 नवंबर महीने में यूनेस्को ने स्मारक दिवस को विश्व धरोहर दिवस के तौर पर मनाने की मंजूरी दी। उसके बाद हर साल 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस दुनियाभर में मनाया जाने लगा।

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