महिला दिवस 8 मार्च को, सशक्त महिलाएं विश्व को सशक्त बनाती हैं
आरएस अनेजा, 06 मार्च नई दिल्ली
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह एक ऐसा दिन है जब महिलाओं को राष्ट्रीय, जातीय, भाषाई, सांस्कृतिक, आर्थिक या राजनीतिक सीमाओं में उनकी उपलब्धियों के लिए मान्यता दी जाती है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 का विषय है- ‘सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए: अधिकार, समानता सशक्तिकरण।’ इस वर्ष का यह विषय सभी के लिए समान अधिकार, शक्ति और अवसर प्रदान करने तथा एक समावेशी भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान करता है जहां कोई भी पीछे न छूटे। इस दृष्टिकोण का मुख्य लक्ष्य अगली पीढ़ी यानि युवाओं, विशेष रूप से युवा महिलाओं और किशोरियों को स्थायी परिवर्तन के उत्प्रेरक के रूप में सशक्त बनाना है।
वर्ष 2025 एक महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि यह बीजिंग घोषणापत्र और कार्रवाई मंच की 30वीं वर्षगांठ है। यह दस्तावेज़ दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए सबसे प्रगतिशील और व्यापक रूप से समर्थित खाका है, जो कानूनी सुरक्षा, सेवाओं तक पहुंच, युवाओं की भागीदारी और सामाजिक मानदंडों, रूढ़ियों और पुराने विचारों में बदलाव के मामले में महिला अधिकारों के एजेंडे को बदल देता है।
केंद्र सरकार विभिन्न नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। देश महिला विकास से महिलाओं के नेतृत्व में विकास की ओर परिवर्तन का गवाह बन रहा है, जो राष्ट्रीय प्रगति में समान भागीदारी सुनिश्चित करता है। महिलाएं भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को आकार देने, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल समावेशन और नेतृत्व की भूमिकाओं में बाधाओं को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं ।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 3 मार्च, 2025 को, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले नमो ऐप ओपन फ़ोरम पर देश की महिलाओं को अपनी प्रेरक जीवन यात्रा साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पहले से प्रस्तुत उल्लेखनीय कहानियों की प्रशंसा की जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं की दृढ़ता और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया। एक विशेष पहल के रूप में उन्होंने घोषणा की कि चयनित महिलाएं अपनी आवाज़ और अनुभवों के विस्तार के लिए 8 मार्च को उनके सोशल मीडिया अकाउंट संभालेंगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं के योगदान को स्वीकृति देना और उनके सशक्तिकरण, दृढ़ता और सफलता की यात्रा को प्रदर्शित करके दूसरों को प्रेरित करना है।
संवैधानिक और कानूनी ढांचा
भारतीय संविधान अपनी प्रस्तावना, मौलिक अधिकारों और राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में प्रावधानों के माध्यम से लैंगिक समानता की गारंटी देता है। अनुच्छेद 14, कानून की नजर में समानता सुनिश्चित करता है जबकि अनुच्छेद 15 लैंगिक आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। अनुच्छेद 51(ए)(ई) नागरिकों को महिलाओं की गरिमा के लिए अपमानजनक प्रथाओं को त्यागने के लिए प्रोत्साहित करता है। निर्देशक सिद्धांत, विशेष रूप से अनुच्छेद 39 और 42, समान आजीविका के अवसर, समान वेतन और मातृत्व राहत पर जोर देते हैं।