छठ पूजा की तैयारियों में जुटी महिलाए , जानिए इस महापर्व के महत्व
जे कुमार, अम्बाला 22 अक्तूबर - दीपावली के बाद अंबाला छावनी के बाजारों में छठ पूजा की तैयारियों में जुटी महिलाओं ने इस महापर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रकृति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महान पर्व है।
एक महिला श्रद्धालु ने जानकारी देते हुए बताया कि छठ पूजा का बहुत महत्व है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया (छठी देवी) की उपासना के लिए समर्पित है। उन्होंने छठ पूजा की प्रमुख जानकारी साझा करते हुए बताया कि:
चार दिवसीय पर्व: यह पर्व चार दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत 'नहाय-खाय' से होती है, जिसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
निराहार व्रत: दूसरे दिन 'खरना' होता है, जिसके बाद व्रती महिलाएं 36 घंटे का कठिन निराहार और निर्जला व्रत रखती हैं।
अर्घ्य दान: इस पूजा में डूबते हुए सूर्य (संध्या अर्घ्य) और उगते हुए सूर्य (ऊषा अर्घ्य) को अर्घ्य (जलदान) देने का विधान है। डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जीवन में अस्त होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उदय होना।
संतान और सुख-समृद्धि: यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है।
महिलाओं ने बताया कि यह पर्व हमें स्वच्छता, सादगी और प्रकृति के संरक्षण का भी संदेश देता है, क्योंकि पूजा सामग्री में अधिकतर वस्तुएँ प्राकृतिक होती हैं और पूजा नदियों या जलाशयों के किनारे संपन्न की जाती है। इस पर्व के माध्यम से वे अपनी आस्था और सांस्कृतिक जड़ों को जीवंत रखती हैं।
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