अम्बाला सदर नगर परिषद में तीन, बराड़ा नगर पालिका में 2 सदस्य हो सकते मनोनित : एडवोकेट हेमंत कुमार
आरएस अनेजा, 31 मार्च नई दिल्ली
हरियाणा में 8 नगर निगमों, 4 नगरपालिका परिषदों एवं 21 नगरपालिका के आम चुनाव सम्पन्न होने के बाद अब प्रदेश सरकार के पास उपरोक्त सभी 33 नगर निकायों में 2 से 3 सदस्यों को मनोनीत अर्थात नामित करने का कानूनी अधिकार है जिनका पदनाम नॉमिनेटेड मेंबर अर्थात मनोनीत सदस्य होता है।
हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि ऐसा करने से पहले हालांकि शहरी स्थानीय विभाग द्वारा प्रदेश के सम्बंधित ज़िलों के डीसी (उपायुक्तों ) को पत्र मार्फ़त उन्हें राज्य के विभिन्न नगर निगमों/नगरपालिका परिषदों/नगरपालिका समितियों में राज्य सरकार द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्यों के तौर पर प्रस्तावित व्यक्तियों के नाम भेजकर संबंधित डीसी से उनके चरित्र सत्यापन अर्थात उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि आदि न रही हो।
हेमंत ने बताया कि न केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 (आर) के अनुसार बल्कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 4 और हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 9 में प्रदेश सरकार द्वारा सम्बंधित नगर निकायों में उन व्यक्तियों को सदस्य के रूप में मनोनीत (नॉमिनेट ) करने का उल्लेख है जो नगरपालिका प्रशासन में विशेष ज्ञान या अनुभव रखते हो।
नगर निगम और नगर परिषद में अधिकतम 3 जबकि नगर पालिका में अधिकतम 2 सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा नॉमिनेट किया जा सकता है। भारतीय संविधान और प्रदेश के नगर निकाय कानूनों में नॉमिनेटेड सदस्यों का प्रावधान इसलिए किया गया क्योंकि आम तौर पर अधिकांश नगर निकाय के निर्वाचित सदस्य ( जिन्हे आम तौर पर पार्षद कहते हैं हालांकि यह शब्द/पदनाम हरियाणा के दोनों नगर निकाय कानूनों में नहीं है ) म्युनिसिपल प्रशासन के विषय में एक्सपर्ट और अनुभवी नहीं होते, इसलिए राज्य सरकार द्वारा कुछ विशेषज्ञों और अनुभवी व्यक्तियों को नगर निगम के सुचारू संचालन और प्रभावी प्रबंधन हेतु मनोनीत किया जा सके।
मनोनित सदस्य सदन की किसी भी बैठक, चाहे सामान्य या विशेष, में शामिल तो हो सकते हैं परन्तु वह उस बैठक में वोट नहीं डाल सकते हैं। यही नहीं कानूनन वह सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं लड़ सकते हैं।
इतना होगा कार्यकाल
अम्बाला नगर निगम के मेयर पद के उपचुनाव में प्रत्यक्ष निर्वाचित भाजपा की शैलजा सचदेवा शामिल का कार्यकाल करीब 9 महीने अर्थात 13 जनवरी, 2026 तक यानि मौजूदा अम्बाला नगर निगम के कानूनन पांच वर्ष के कार्यकाल तक ही रहेगा। वहीं नव-निर्वाचित अम्बाला सदर नगर परिषद, नगर पालिका बराड़ा के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष (प्रेसिडेंट) और वार्ड सदस्यों का कार्यकाल पूरे पांच वर्ष यानि मार्च 2030 तक होगा।