06/02/26

सुखबीर बादल के प्रेसिडेंट रहते अकाली दल से कोई समझौता नहीं होगा: ज्ञानी हरप्रीत सिंह

जे कुमार अमृतसर, 06 फरवरी 2026: शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत के प्रेसिडेंट ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने आज एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंथक राजनीति और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक श्री अकाल तख्त साहिब से भगोड़ा घोषित सुखबीर सिंह बादल पार्टी के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं, तब तक किसी भी तरह का राजनीतिक समझौता संभव नहीं है।

सुखबीर बादल का गिरफ्तारी ऑफर महज 'ड्रामा' ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सुखबीर बादल के डीजीपी ऑफिस जाकर गिरफ्तारी देने की पेशकश को 'पॉलिटिकल ड्रामा' करार दिया। उन्होंने कहा कि उसूलों और सिद्धांतों के बिना सत्ता हासिल करना व्यर्थ है। उनके अनुसार, अगर सुखबीर बादल पद छोड़ते हैं, तभी पंथक हितों की रक्षा के लिए कोई सार्थक कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।

पवित्र सरूपों की छपाई में भ्रष्टाचार और बेअदबी का खुलासा ज्ञानी जी ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि शिरोमणि कमेटी द्वारा छापे गए 190 पवित्र सरूपों में भारी लापरवाही बरती गई। उन्होंने कहा कि छपाई के लिए इस्तेमाल कागज इतना खराब और पतला था कि अक्षर दूसरी तरफ भी दिखाई दे रहे थे। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए जत्थेदार रघबीर सिंह पर इन सरूपों का अंतिम संस्कार करने का दबाव डाला गया ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

पंजाब में बढ़ता डेरावाद और साजिश डेरावाद पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से सिखों को गुरुद्वारों और 'शब्द' से अलग करने की एक गहरी साजिश रची जा रही है। आज सिख गुरुद्वारों को छोड़कर डेरों की ओर बढ़ रहे हैं, जो पंजाब और कौम के लिए घातक है। उन्होंने बिक्रम मजीठिया जैसे नेताओं के डेरों से संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में अब सिद्धांतों पर भाई-भतीजावाद हावी हो गया है।

SGPC के प्रबंधन पर 'व्हाइट पेपर' की मांग ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने मांग की है कि वर्ष 1999 से अब तक शिरोमणि कमेटी के प्रबंधन, जमीन घोटालों और वित्तीय लेन-देन पर एक विस्तृत 'व्हाइट पेपर' जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें अवसर मिला, तो वे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर दोषियों को सजा दिलाएंगे।

धार्मिक नैतिकता और अन्य मुद्दे उन्होंने गुरुद्वारा परिसरों में पैसे बांटने की प्रथा पर भी कड़ा ऐतराज जताया और इसे तुरंत बंद करने की अपील की। साथ ही, दिल्ली कमेटी के नेताओं की कांग्रेस के साथ हुई हालिया बैठक को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

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