14/09/25

आत्मा ही सनातन सत्य है, देह इसका धाम है : महाराज

जे कुमार, अम्बाला 14 सितम्बर - श्री सनातन धर्म सभा (पंजी0) अंबाला छावनी के पितृ उद्धार हेतु संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के के छठे दिन के प्रवचन का शुभारंभ गोपी गीत से किया। महाराज ने भगवान कृष्ण व गोपियों के भावात्मक सानिध्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मा ही सनातन सत्य है, देह इसका धाम है। अतः इस दिव्य धाम की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस कलुषित करने वाले भावों से बचकर ही प्रभु का अनुराग पाया जा सकता है, आत्मा ही कल्पवृक्ष एवं कामधेनु है।

भगवान के वंृदावन गमन और राधा- कृष्ण की आलौकिक लीलाओं का वर्णन किया। उद्धव प्रसंग पर अमृतवर्षा करने हुए महाराज ने कहा कि उद्धव प्रसंग पर अमृतवर्षा करते हुए महाराज ने कहा कि उद्धव ने गोपियों को निगुर्ण ब्रह्म एवं योग का उपदेश देना चाहा। लेकिन गोपियां ज्ञानमार्ग की बजाय प्रेममार्ग को पसंद करती थी। वे भगवान् से एकनिष्ठ प्रेम में दृढ़ विश्व प्रकट करती हैं।

महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से गोैरक्षा की बात कहीं क्योंकि गाय को नष्ट करने से वेद, ब्राह्मण, तपस्या और यज्ञ स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं। राजा परीक्षित द्वारा श्री सूत जी से पूछे गए प्रश्नों का माध्यम से महाराज ने श्रोताओं की इच्छाओं को शांत किया। श्रीमद्भगवत में भगवान के कर्मयोग को कर्मसन्यास से भी श्रेष्ठ बताया है। जीव का निष्काम भाव से अपने कर्तव्य कापालन करना चाहिए। सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया। भगवान श्री कृष्ण रूकमिणी विवाह हुआ । चारों और मंगल गीत गाए।

कथा पंडाल महाराज को प्रो. तारा चन्द गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, कोषाध्यक्ष श्री अशोक सिंगला, कैलाश मल्होत्रा, बृज मोहन गोयल, राकेश गुप्ता, लक्ष्मी नारायण खन्ना, सुशील गोयल, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, माया राम बंसल, संजय मल्होत्रा, विद्यालय प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह और मन्दिर पुजारियों ने पुष्पहार भेंट कर अभिनंदन किया। मंच संचालन लक्ष्मी नारायण खन्ना ने श्रोताओं से अनुरोध किया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के एक दिन शेष हंै।

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