होंडा डीएल ट्रेनिंग सेंटर में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा एवं राहवीर योजना के प्रति किया जागरूक
करनाल, 28 जून (अन्नू): जिला पुलिस करनाल द्वारा चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न्यू बस स्टैंड के पास स्थित होंडा डीएल ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित हुआ, जहां आईटीआई करनाल से प्रशिक्षण के लिए आए विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा सरकार की महत्वाकांक्षी 'राहवीर योजना' के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया。
यातायात नियमों का पालन और सुरक्षित ड्राइविंग की सीख
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे हाईवे थाना करनाल के कॉर्डिनेटर व सहायक उप निरीक्षक (ASI) अजय कुमार ने विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा की बारिकियों से रूबरू कराया। उन्होंने युवाओं को जागरूक करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बातें रेखांकित कीं:
सुरक्षा उपकरण: दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चौपहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का नियमित और अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
लापरवाही से बचें: वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने से ध्यान भटकता है, जो दुर्घटना का मुख्य कारण बनता है; इससे पूरी तरह बचें।
नशा और रफ्तार: नशे की हालत में या तय सीमा से अधिक रफ्तार में वाहन कभी न चलाएं, क्योंकि यह आपके साथ-साथ दूसरों की जान को भी जोखिम में डालता है।
साइबर अपराधों से बचाव के लिए याद रखें '1930'
बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर चिंता जताते हुए एएसआई अजय कुमार ने विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचने के अचूक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी कॉल के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP) या बैंक संबंधी जानकारी कभी साझा न करें।
सोशल मीडिया या मैसेज पर आने वाले किसी भी संदिग्ध या लुभावने लिंक पर क्लिक न करें।
यदि कोई साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
'राहवीर योजना': घायल की मदद करने पर सरकार करेगी सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को 'राहवीर योजना' (गुड समैरिटन स्कीम) के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना के शुरुआती 1 घंटे को 'गोल्डन ऑवर' माना जाता है, जिसमें घायल को इलाज मिलने पर उसकी जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है। इस योजना के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तय समय के भीतर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार राहगीरों (राहवीरों) को सरकार द्वारा बकायदा प्रोत्साहन राशि और सम्मान पत्र प्रदान किया जाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी पुलिसिया या कानूनी पचड़े के डर से मुक्त होकर, विशुद्ध रूप से मानवता के नाते घायल की मदद के लिए आगे आएं।
कार्यक्रम के समापन पर ट्रेनिंग सेंटर में मौजूद सभी छात्र-छात्राओं ने प्राप्त जानकारी की सराहना की और स्वयं यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने के साथ-साथ समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का सामूहिक संकल्प लिया।
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