01/06/26

बोह में सिद्ध बाबा लाल दास महाराज का वार्षिक उत्सव मेला संपन्न: श्रद्धालुओं ने टेका माथा

जे कुमार बोह (अम्बाला), 1 जून 2026: अम्बाला के समीपवर्ती क्षेत्र बोह में श्री श्री 108 सिद्ध बाबा लाल दास महाराज का वार्षिक उत्सव मेला एवं संत समागम पूरी श्रद्धा, हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में संपन्न हो गया। इस पारंपरिक और प्रसिद्ध मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा की पवित्र समाधि पर माथा टेका और मन्नतें मांगकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

हवन यज्ञ और रुद्राभिषेक के साथ हुई शुरुआत; मथ्या विशाल लंगर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आयोजित इस उत्सव कार्यक्रम की शुरुआत अलसुबह रामायण पाठ के भोग के साथ की गई। इसके उपरांत मुख्य पंडाल में पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पावन हवन यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें आए हुए संत-महात्माओं, मुख्य यजमानों और आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने पूर्ण आहुतियां अर्पित कीं। इसी कड़ी में विशेष रूप से धर्मनगरी हरिद्वार से बुलाए गए विद्वान पंडितों की टोली द्वारा भगवान भोलेनाथ का भव्य रुद्राभिषेक किया गया, जिसमें संपूर्ण क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और आपसी शांति की कामना की गई। मुख्य आरती के समापन के तुरंत बाद श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल भंडारे (लंगर) का आयोजन हुआ, जिसमें देर शाम तक हजारों की तादाद में संगत ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। शाम के समय मेले के पारंपरिक हिस्से के रूप में एक विशाल कुश्ती दंगल (प्रतियोगिता) का भी आयोजन किया गया, जो दर्शकों के बीच भारी आकर्षण का केंद्र रहा।

उदासीन आश्रम के संतों के सानिध्य में हुआ समागम

यह विशाल और भव्य धार्मिक आयोजन महंत स्वामी प्रकाश मुनि महाराज उदासीन तथा डॉ. महंत स्वामी श्रवण मुनि महाराज उदासीन ठाकुर के पावन सानिध्य में उदासीन आश्रम द्वारा पूरी व्यवस्था के साथ संपन्न कराया गया। समागम में पहुंचे विभिन्न अखाड़ों और आश्रमों के पूज्य संतों का भी श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।

जब बाबा की जल समाधि से मुड़ गया था टांगरी नदी का रुख

इस पावन अवसर पर पहुंचे वार्ड नंबर तीन के स्थानीय पार्षद मोहित कौशिक ने बाबा लाल दास महाराज के इतिहास और उनसे जुड़ी प्राचीन मान्यताओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए बताया:

"प्राचीन समय में पहाड़ी उफान के कारण टांगरी नदी बोह क्षेत्र में भयंकर तबाही मचाती थी, जिससे इस पूरे इलाके को बार-बार भारी प्राकृतिक आपदाओं और बाढ़ का सामना करना पड़ता था। जनश्रुति और बुजुर्गों के अनुसार, तब परम संत बाबा लाल दास महाराज ने लोक-कल्याण के लिए इसी स्थान पर कठोर साधना की और अंततः जल समाधि ले ली। बाबा की इस अलौकिक शक्ति के बाद टांगरी नदी का तेज प्रवाह हमेशा के लिए मुड़कर गांव की दूसरी दिशा में चला गया।"

स्थानीय ग्रामीणों का आज भी यह अटूट विश्वास है कि बाबा लाल दास महाराज की असीम कृपा और ओट के कारण ही यह पूरा क्षेत्र बाढ़, आकाशीय ओलावृष्टि और फसलों को तबाह करने वाले टिड्डी दल जैसी तमाम बड़ी प्राकृतिक विपत्तियों से हमेशा पूरी तरह सुरक्षित और खुशहाल रहता है।

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