18 पुराणों में सर्वश्रेष्ठ श्रीमद्भागवत गीता ही है : - श्रीराम मुद्रगल शास्त्री
जे कुमार, अम्बाला 9 सितम्बर - भागवत महापुराण कथा, जो श्री सनातन धर्म मन्दिर हिल रोड अंबाला छावनी में हो रही है। इस कथा ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिवस पर अमृतवर्षा करते हुए व्यासपीठ पर विराजमान श्रीराम मुद्रगल शास्त्री ने कहा- श्रीमद्भागवत बहुत ही आलोैकिक, विचित्र व प्रासादिक ग्रंथ है जिसमें जीव मात्र के उद्धार के लिए तीन राजमार्गों में से पहला वेैदिक प्रस्थान (उपनिषद), दूसरा प्रस्थान दार्शनिक ( ब्रह्मसूत्र), और तीसरा स्मार्त प्रस्थान (भगवद्गीता), हैं।
भगवद्गीता श्लोक होते हुए भी भगवान की वाणी के रूप में मंत्र हैं। उपनिषद् पात्र मनुष्यों के काम की विषयवस्तु है, ब्रह्मसूत्र विद्वानों के काम की चीज है जबकि भगवद्गीता सभी जीवों के लिए अति उपयोगी विषय वस्तु है। इसीलिए श्रीमद्भागवद गीता विश्व साहित्य में अद्वितीय विलक्षण गुणों से संपत्र स्वयं श्री जगदीश्वर की वाणी है जिसके श्रवण मात्र से जीवात्मा आवागमन के चक्र से हमेशा के लिए मुक्ति पा लेती है।
महाराज ने कहा- श्रीमद्भागवत एक दिव्य ग्रंथ है। संन्यासी के लिए यह वैराग्य की पराकाष्ठा है और साधारण संसारी के लिए अपूर्व सहायक व पथ -प्रदर्शक है। जो संसार के त्रिविध तापों से मुक्ति पाने के लिए एक अमोघ औषध हैै। 18 पुराणों में सर्वश्रेष्ठ श्रीमद्भागवत गीता ही है।
श्रीमद्भागवत के श्रवण से भगवान का स्वरूप, सामथ्र्य तथा स्वभाव कैसा है, पता चलता है। कथा स्थल पर श्री सनातन धर्म सभा के ओर से सभा प्रधान प्रो तारा चन्द गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, कैलाश मल्होत्रा, माया राम बंसल, लक्ष्मी नारायण खन्ना, बृज मोहन गोयल, सुशील गोयल, राकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, संजय मल्होत्रा, प्रधानाचार्या ठाकुर सिंह तथा मन्दिर पुजारियों आदि ने महाराज को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।
श्री लक्ष्मी नारायण खन्ना ने सभी धर्मप्रमियों को कल से ठीक 3ः30 बजे कथा पंडाल में पधारने का आग्रह किया ताकि महाराज श्री के प्रवचनों को भरपूर लाभ प्राप्त किया जा सके।
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