‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के चौथे दिन उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसानों से मिले शिवराज सिंह चौहान, चारपाई पर बैठकर की चर्चा
आरएस अनेजा, 02 जून नई दिल्ली
करोड़ों किसानों से संवाद के लक्ष्य के साथ ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस देशव्यापी अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे है। ओडिशा से शुभारंभ के बाद, जम्मू और उसके बाद हरियाणा के पानीपत से होते हुए इस अभियान के तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज चौथे दिन उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसानों से संवाद किया।
मेरठ के दबथुवा ग्राम और जन्गेथी ग्राम में चारपाई पर बैठकर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा की। इस दौरान किसानों की व्यावाहारिक समस्याओं को भी सुना और उनके समाधान के मार्ग भी सुझाएं।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के हर किसान को सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि 29 मई को चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि थी और उसी दिन हमने ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ प्रारम्भ किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि चौधरी चरण सिंह से बड़ी प्रेरणा खेती के लिये और कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा है। श्री चौहान ने कहा कि किसान अन्नदाता भी है और जीवनदाता भी।
उन्होंने कहा कि किसान मेरे रोम- रोम में है और खेती हर सांस में बसी है। विकसित खेती और समृद्ध किसानों के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है।
शिवराज सिंह ने कहा कि खेतों में जाकर ही समस्या का असली पता चलता है। जैसे आज गन्ने की खेती में देखा की एक रोग जिसे स्थानीय भाषा में किसान ‘लाल सड़न’ कहते है, किस प्रकार से हानिकारक है। ऐसे ही कई उदाहरण है जिन्हें जमीन पर उतर कर ही समझा जा सकता है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों और वैज्ञानिकों को जोड़ने और ‘लैब टू लैंड’ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की कल्पना की गई है। शोध का लाभ किसानों तक पहुंचे इसके लिए 16 हजार वैज्ञानिकों की 2170 टीमें बनाई गई हैं, जो गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद कर रही हैं।