एस.डी. कॉलेज में 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस' पर संगोष्ठी; खेल और अर्थव्यवस्था में 'IPR' के महत्व पर हुई चर्चा
जे कुमार अम्बाला छावनी, 25 अप्रैल 2026: नवाचार और रचनात्मकता को कानूनी संरक्षण देने के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सनातन धर्म (एस.डी.) कॉलेज में 'विश्व बौद्धिक संपदा दिवस' (World IP Day) के उपलक्ष्य में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कॉलेज के 'इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल' (IIC) और पुस्तकालय विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “आईपी एंड स्पोर्ट्स: रेडी, सेट, इनोवेट” रहा।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर मंथन किया गया।
खेल जगत में बौद्धिक संपदा की भूमिका
मुख्य वक्ता एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलेश कुमार ने अपने व्याख्यान में बताया कि खेल केवल शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक विशाल आर्थिक क्षेत्र है जहाँ बौद्धिक संपदा की अहम भूमिका है:
ट्रेडमार्क: टीमों के नाम, लोगो और ब्रांडिंग को सुरक्षा प्रदान करना।
कॉपीराइट: खेलों के लाइव प्रसारण और डिजिटल कंटेंट के अधिकारों का संरक्षण।
पेटेंट: खेल उपकरणों (जैसे उन्नत जूते, रैकेट या वियरेबल तकनीक) में होने वाले तकनीकी नवाचारों को सुरक्षित करना।
उन्होंने जोर दिया कि इन अधिकारों के माध्यम से खिलाड़ियों और संस्थानों को न केवल पहचान मिलती है, बल्कि बड़े स्तर पर आर्थिक लाभ भी प्राप्त होता है।
अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स के लिए संजीवनी
आईआईसी (IIC) संयोजक डॉ. प्रेम सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं। इससे नए उद्योगों की स्थापना होती है और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने स्टार्टअप्स शुरू करने के इच्छुक युवाओं को अपने 'मौलिक विचारों' को दस्तावेजीकृत करने और उन्हें कानूनी रूप से सुरक्षित करने की सलाह दी।
सफल संचालन और भागीदारी
संगोष्ठी का प्रभावशाली संचालन सह-संयोजक सुश्री मुस्कान अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में कुल 55 विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया और विषय से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान किया। इस दौरान आईआईसी सदस्य अंकुश अरोड़ा, डॉ. आरती अरोड़ा और डॉ. छवि किरण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
प्राचार्या का संदेश
प्राचार्या डॉ. अलका शर्मा ने अपने संदेश में कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार राष्ट्र निर्माण और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता को पहचानने और उसे एक नई पहचान दिलाने के लिए प्रेरित किया।
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