चपरासी की 'शाही' विदाई: पानीपत में 23 साल की नौकरी के बाद 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर गांव पहुंचे महाबीर बांगड़
पानीपत, 3 जुलाई (अन्नू): अमूमन लोग सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद कार, सरकारी गाड़ी या रथ पर सवार होकर अपने घर लौटते हैं, लेकिन हरियाणा के पानीपत जिले में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (सेवादार) ने अपनी विदाई को ऐसा ऐतिहासिक और अनोखा बना दिया कि देखने वाले दंग रह गए। फूड एंड सप्लाई विभाग में 23 साल तक चपरासी के पद पर अपनी सेवाएं देने वाले 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ अपनी सेवानिवृत्ति के बाद करीब 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर अपने गांव पहुंचे। फूलों और रंग-बिरंगी चुन्नियों से सजी इस क्रेन पर सवार महाबीर का स्वागत देखने के लिए पूरे रास्ते सड़कों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
वर्षों पुराना सपना किया पूरा, जून की शुरुआत से चल रही थी प्लानिंग
महाबीर बांगड़ ने बताया कि उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई अधिकारी-कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पारंपरिक तरीके से विदाई लेते देखा था। तभी उन्होंने मन ही मन यह संकल्प ले लिया था कि जब उनकी बारी आएगी, तो वह इस पल को सबसे जुदा और हमेशा के लिए यादगार बनाएंगे।
उनके बेटे अमित के मुताबिक, जून 2026 की शुरुआत से ही परिवार ने इस अनोखी विदाई की रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी थी। कई तरह के सुझावों के बीच महाबीर ने खुद हाइड्रा क्रेन पर सवार होने का विचार रखा, जिसे परिवार ने तुरंत मंजूरी दे दी। इसके लिए रिटायरमेंट से करीब 10 दिन पहले ही हाइड्रा क्रेन को बुक कर लिया गया था और 29 जून की रात को इसे फूलों व मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया। सुरक्षा के मद्देनजर क्रेन की पूरी तकनीकी जांच भी कराई गई थी।
सचिवालय में मिला सम्मान, 10 मिनट का सफर 50 मिनट में हुआ पूरा
30 जून को महाबीर बांगड़ के रिटायरमेंट के दिन पहले मतलौडा तहसील और फिर पानीपत के जिला लघु सचिवालय में विभागीय साथियों व उच्चाधिकारियों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं, स्मृति चिन्ह भेंट किए और मिठाई खिलाकर विदाई दी।
इसके बाद शुरू हुआ महाबीर का 'शाही' सफर। वह सजी-धजी हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर मतलौडा से अपने पैतृक गांव कवि के लिए रवाना हुए। क्रेन की धीमी रफ्तार और जश्न के माहौल के चलते करीब 5 किलोमीटर का यह सफर, जो आमतौर पर केवल 10 मिनट में पूरा हो जाता है, उसे पूरा होने में लगभग 50 मिनट का समय लगा।
थार-स्कॉर्पियो के काफिले के बीच पूरे रास्ते थिरकते रहे महाबीर
सफर के दौरान महाबीर बांगड़ के आगे और पीछे रिश्तेदारों, दोस्तों और ग्रामीणों की थार व काली स्कॉर्पियो गाड़ियों का एक लंबा काफिला चल रहा था। क्रेन के ऊंचे बूम पर सवार महाबीर पूरे रास्ते डीजे की धुन पर जमकर डांस करते रहे। इस अनोखे और अद्भुत नजारे को देखने के लिए रास्ते में लोग अपनी गाड़ियां रोककर अपने मोबाइल कैमरों में वीडियो रिकॉर्ड करते नजर आए। आपको बता दें कि महाबीर का पैतृक गांव कवि वही गांव है, जहाँ के रहने वाले महिपाल ढांडा वर्तमान में हरियाणा के शिक्षा मंत्री हैं।
घर पहुंचते ही पत्नी ने उतारी आरती, सोच की हो रही तारीफ
जैसे ही महाबीर बांगड़ हाइड्रा क्रेन से उतरकर अपने घर की चौखट पर पहुंचे, वहाँ उत्सव का माहौल हो गया। उनकी पत्नी शीला देवी और पूरे गांव के लोगों ने आरती उतारकर, माथे पर तिलक लगाकर और फूलों की भारी बारिश कर उनका जोरदार स्वागत किया, जिसके बाद उनका गृह प्रवेश कराया गया।
भले ही महाबीर विभाग में एक सेवादार के पद पर तैनात रहे, लेकिन उनकी इस अनोखी और सबसे अलग सोच की पूरे इलाके में जमकर चर्चा हो रही है। महाबीर के परिवार में उनकी पत्नी शीला देवी (गृहिणी) के अलावा दो बेटे अमित व मोहित और एक बेटी (विवाहित) हैं। उनका एक बेटा चानू अमेरिका (USA) में रहता है।
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