पंचकूला: भारतीय खाद्य निगम में हिंदी कार्यशाला संपन्न; "शब्द केवल अक्षरों का संयोजन नहीं, अर्थ की जिम्मेदारी भी हैं"
जे कुमार पंचकूला, 28 मार्च 2026: भाषा केवल संवाद का साधन नहीं, बल्कि हमारे विचारों और संवेदनाओं का प्रतिबिंब है। इसी उद्देश्य के साथ भारतीय खाद्य निगम (FCI), पंचकूला के क्षेत्रीय कार्यालय में "हिंदी का मानक व वर्तनी रूप" विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से सरस्वती पूजन और मुख्य अतिथि के हरित स्वागत के साथ हुआ, जिसमें राजभाषा के महत्व पर गंभीर चर्चा की गई।
संवैधानिक महत्व और प्रशासनिक सुगमता: कार्यशाला के प्रथम सत्र में श्रीमती नीरू ने हिंदी भाषा के संवैधानिक दर्जे और सरकारी कामकाज में इसके बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी नियमों को साझा करते हुए बताया कि सरकारी फाइलों और पत्राचार में हिंदी का सरल और सही प्रयोग न केवल पारदर्शिता लाता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों को भी सुगम बनाता है। उन्होंने अधिकारियों को राजभाषा के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया।
वर्तनी की शुद्धता और मानक रूप: द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. संगम वर्मा ने "हिंदी का मानक एवं वर्तनी रूप" पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कर्मचारियों के साथ संवादात्मक शैली अपनाते हुए विभिन्न अभ्यासों के जरिए वर्तनी की सूक्ष्मताओं को समझाया। डॉ. वर्मा ने जोर देकर कहा कि "शब्द केवल अक्षरों का संयोजन नहीं, बल्कि अर्थ की जिम्मेदारी भी होते हैं।" उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से मानक और अमानक शब्दों के अंतर को स्पष्ट किया और बताया कि कैसे एक छोटी सी मात्रा की त्रुटि अर्थ का अनर्थ कर सकती है।
अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति: इस ज्ञानवर्धक सत्र में कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे दैनिक कार्यालयी कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। कार्यक्रम में उप महाप्रबंधक (क्षेत्र) श्री मृणाल सिंह, उप महाप्रबंधक (राजभाषा) शशि रंजन और मंच संचालिका मीनाक्षी अत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला के समापन पर वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि हिंदी की शुद्धता ही उसकी वास्तविक शक्ति है और इसे अपनाना हम सभी का नैतिक दायित्व है।
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