उत्तर क्षेत्रीय युवमहोत्सव 2025 : संस्कृत के नवोदय का प्रतीक बनेगा यह आयोजन
जे कुमार, अम्बाला 1 नवंबर - केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के द्वारा श्री दीवान कृष्णकिशोर सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय,अम्बाला छावनी में पहली बार उत्तर क्षेत्रीय युवमहोत्सव 2025 का आयोजन 3 से 5 नवम्बर तक किया जाएगा।
यह तीन दिवसीय आयोजन संस्कृत भाषा, साहित्य, संस्कृति और खेल के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को एक मंच पर लाने का उद्देश्य रखता है। इसमें हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से लगभग 500 छात्र-छात्राएँ भाग लेंगे।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विष्णु दत्त शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का उद्घाटन 3 नवम्बर को 10.30 बजे सनातन धर्म के सभागार में होगा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी,मुख्य अतिथि होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो.मदनमोहन झा, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के पूर्व कुलपति प्रो. राधेश्याम शर्मा और सम्मानित अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन त्रिपाठी सारस्वत अतिथि लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रो रामसलाही द्विवेदी शामिल रहेंगे। समापन समारोह 5 नवम्बर को आयोजित होगा, जिसमें विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
युवमहोत्सव में संस्कृत वार्ता लेखन, संस्कृतलघु चलचित्र निर्माण, संगणक-संस्कृत, संस्कृत अनुवाद प्रतियोगिता और संस्कृत ब्लॉग जैसी प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी। सांस्कृतिक खंड में एकल एवं समूह गीत, संस्कृत समूह नृत्य की प्रस्तुतियाँ होंगी, जिनसे भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और लोक परंपरा की झलक देखने को मिलेगी। छात्रों में खेल भावना को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, मल्लयुद्ध और दौड़ स्पर्धाएँ भी होंगी।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अशोक मिश्र ने कहा कियह युवमहोत्सव संस्कृत के नवजागरण का प्रतीक है। हमारा उद्देश्य है कि युवा संस्कृत को परंपरा के साथ-साथ आधुनिकता से भी जोड़कर देखें।उन्होंने बताया कि सभी गतिविधियाँ संस्कृत भाषा में आयोजित की जाएँगी तथा सांस्कृतिक संध्या में संस्कृत संगीत प्रस्तुतियाँ विशेष आकर्षण होंगी।
यह आयोजन संस्कृत के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा और युवाओं में यह विश्वास जगाएगा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य की धड़कन है।
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