नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना शुरू की
आरएस अनेजा, 30 अप्रैल नई दिल्ली
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने नई दिल्ली में "हरित हाइड्रोजन आपूर्ति श्रंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अवसरों" पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला का उद्देश्य भारत में हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम के विकास में एमएसएमई की प्रमुख भूमिका पर चर्चा करना और अवसरों का पता लगाना था। एमएसएमई, नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, उद्योग संघों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों सहित विभिन्न हितधारक समूहों के 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद वेंकटेश जोशी ने उद्घाटन भाषण में नवाचार आधारित विकास को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला और इस बात पर बल दिया कि एमएसएमई अपनी नवीन क्षमताओं और स्थानीय समाधानों के माध्यम से भारत के ऊर्जा परिवर्तन की रीढ़ के रूप में काम करेंगे। उन्होंने वर्ष 2030 तक आत्मनिर्भर हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम के निर्माण के मिशन के उद्देश्यों को साकार करने में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने भारत की हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (जीएचसीआई) का भी शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि यह योजना हरित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रमाणित करने और पारदर्शिता, जानकारी प्राप्त करने और बाजार की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत ढांचा बनाने की दिशा में एक आधारभूत कदम है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के कार्यान्वयन में कुछ प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने एमएसएमई को इस नए औद्योगिक परिदृश्य में सार्थक रूप से भाग लेने के लिए सशक्त बनाने हेतु क्षमता निर्माण, वित्त की सुविधा और प्रौद्योगिकी संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने हरित हाइड्रोजन के लिए संस्थागत और ढांचागत सहायता के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें एमएसएमई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।