अंबाला: PM श्री केंद्रीय विद्यालय क्र. 2 में 'राष्ट्रीय एकता पर्व' कला उत्सव शुरू; हरियाणा व हिमाचल के 260 विद्यार्थियों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा
अंबाला, 12 अगस्त (अन्नू): पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक दो (PM Shri Kendriya Vidyalaya No. 2), अंबाला कैंट में 'राष्ट्रीय एकता पर्व-2026' के अंतर्गत दो दिवसीय संभाग स्तरीय कला उत्सव का शानदार आगाज हुआ। केंद्रीय विद्यालय संगठन, गुरुग्राम संभाग के तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के 10 क्लस्टरों से आए 260 बाल कलाकारों ने अपनी बहुमुखी कलात्मक और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का आधिकारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि एयर कमोडोर एस. तामस्कर और अफ्वा (लोकल) की अध्यक्ष सलोनी तामस्कर ने दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कला विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का एक सशक्त माध्यम है।
मंच पर उतरा मिनी इंडिया: यक्षगान, हिमाचली और हरियाणवी रागिनी की धूम
उत्सव के पहले दिन विद्यार्थियों ने भारत की रंग-बिरंगी सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत कर दिया:
शास्त्रीय व लोक नृत्य: विद्यार्थियों ने हरियाणवी रागिनी, मणिपुरी नृत्य, पश्चिम बंगाल समूह नृत्य के साथ-साथ कर्नाटक के प्रसिद्ध लोकनाट्य 'यक्षगान' की मनमोहक प्रस्तुति दी। पारंपरिक वेशभूषा और मुख-सज्जा के साथ पौराणिक गाथाओं के प्रदर्शन ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
हिमाचली व त्रि-राज्यीय संगम: पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों ने हिमाचल की लोक संस्कृति पर आधारित ऊर्जावान समूह नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं, एक अन्य प्रस्तुति में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।
दृश्य कला (Visual Arts) में दिखाई कल्पनाशीलता
दृश्य कला प्रतियोगिता के अंतर्गत बाल कलाकारों ने अपनी कलात्मक निपुणता का प्रदर्शन किया:
चित्रकला व मूर्तिकला: टू-डी (2D) कला, पेंटिंग, प्रिंट मेकिंग, कैरिकेचर और थ्री-डी (3D) मूर्तिकला में विद्यार्थियों ने अद्भुत मॉडल तैयार किए।
पारंपरिक शिल्प: स्थानीय शिल्प, स्वदेशी खिलौनों और पारंपरिक भारतीय खेलों पर आधारित कलाकृतियों के जरिए भारतीय लोक कलाओं को खूबसूरती से प्रदर्शित किया गया।
नाट्य मंचन से दिया सामाजिक व देशभक्ति का संदेश
कला उत्सव की नाट्य प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने गंभीर सामाजिक मुद्दों को उजागर किया:
सावित्रीबाई फुले का योगदान: महिला शिक्षा और सशक्तिकरण में सावित्रीबाई फुले के ऐतिहासिक योगदान का मंचन।
सामाजिक नाटक: प्रसिद्ध एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का भावपूर्ण मंचन।
देशभक्ति व बेटी बचाओ: देशभक्ति और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे महत्वपूर्ण संदेशों पर आधारित नाटकों ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
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