जीएमएन कॉलेज मे धन्वंतरि त्रयोदशी के अवसर पर राष्ट्रीय बौद्धिक संगोष्ठी
जे कुमार, अम्बाला 18 अक्तूबर - आरोग्य भारती, अम्बाला ज़िला (हरियाणा प्रांत) द्वारा गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज अम्बाला छावनी में धन्वंतरि त्रयोदशी के पावन अवसर पर एक राष्ट्रीय बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद के साथ किया गया, जो स्वास्थ्य और चिकित्सा के देवता माने जाते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. जयप्रकाश गुप्ता, महासचिव, आरोग्य भारती (अम्बाला इकाई) रहे। उन्होंने अपने विचार रखते हुए आयुर्वेद के दार्शनिक एवं नैतिक आधारों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. गुप्ता ने आयुर्वेद के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि यह परंपरा भगवान धन्वंतरि तक पहुँचती है, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार और दिव्य वैद्य माना गया है। उन्होंने ‘आत्मा’ की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला, जो न तो पाश्चात्य दर्शन में और न ही इस्लामी विचारधारा में दिखाई देती है।
उन्होंने चिकित्सा के चार स्तंभों की व्याख्या करते हुए कहा कि इनमें से एक महत्वपूर्ण स्तंभ नर्सें हैं, जो सेवा, करुणा और सहानुभूति का प्रतीक हैं। उन्होंने अंत में ‘अनुराग’ की अवधारणा पर बात की — यह एक विशिष्ट भारतीय विचार है, जिसका अर्थ है रोगी के प्रति गहरी सहानुभूति और संवेदनशीलता, जो अन्य चिकित्सा या दार्शनिक परंपराओं में नहीं मिलती।
कार्यक्रम का संचालन एवं मेजबानी डॉ. रोहित दत्त, प्राचार्य, जी.एम.एन. कॉलेज, ने की। उन्होंने अपने फार्मास्यूटिकल पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई बातें साझा कीं और थेराप्यूटिक इंडेक्स (Therapeutic Index) की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आयुर्वेदिक और एलोपैथिक चिकित्सा प्रणालियों के संतुलन, स्वस्थ जीवनशैली तथा रोग-निवारक स्वास्थ्य उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
डॉ. दत्त ने यह भी बताया कि हमारी दैनिक जीवनशैली में कई ऐसे तत्व मौजूद हैं जो कैंसरजनक (carcinogenic) हो सकते हैं — यहाँ तक कि कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयुक्त पौधे या जड़ी-बूटियाँ भी सावधानी और वैज्ञानिक दृष्टि से परखे जाने चाहिएं।
संगोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. रोहिणी, ज़िला अध्यक्ष, आरोग्य भारती (अम्बाला इकाई) एवं राज्य प्रमुख (महिला स्वास्थ्य, हरियाणा) ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “जैसा आहार, वैसा शरीर”, और सभी को सचेत होकर भोजन चुनने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिदिन दस मिनट ध्यान लगाने से मानसिक और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है, जिससे जीवन में शांति और सामंजस्य बना रहता है।
कार्यक्रम में मुख्यतः नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वक्ताओं से संवाद किया। इस अवसर पर आकाश कक्कड़ (ज़िला संस्कारक), सुभाष मित्तल (उपाध्यक्ष, अम्बाला इकाई), और कमल सिंघवाणी (कोषाध्यक्ष) सहित आरोग्य भारती के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागी पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के संगम पर महत्वपूर्ण विचारों से समृद्ध हुए।
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