01/12/25

अंबाला छावनी में नारकोटिक्स विभाग का छापा, ट्रिडेंट ड्रग कंपनी का दफ्तर सील

अंबाला, 1 दिसंबर, आरएस अनेजा - अंबाला छावनी के डिफेंस कॉलोनी में सोमवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब नारकोटिक्स कंट्रोल विभाग की टीम ने अचानक एक फार्मा ऑफिस पर छापा मारा। विभाग को सूचना मिली थी कि इलाके में संचालित एक कंपनी द्वारा प्रतिबंधित दवाइयों की सप्लाई की जा रही है। इसी सूचना के आधार पर विभाग ने कार्रवाई को अंजाम दिया और मौके से कई तरह की दवाइयों के सैंपल कब्जे में लिए।

ट्रिडेंट ड्रग कंपनी का दफ्तर सील

छापेमारी के दौरान नारकोटिक्स विभाग की टीम ने जिस दफ्तर को निशाना बनाया, वह ट्रिडेंट ड्रग नाम की कंपनी का कार्यालय है। टीम ने ऑफिस में मौजूद दस्तावेजों, स्टॉक और पैकेजिंग सामग्री की जांच की। प्रारंभिक जांच के बाद विभाग ने कंपनी के पूरे कार्यालय को सील कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक कार्यालय को सील करना आवश्यक था ताकि जांच के दौरान कोई भी सामग्री हटाई या बदली न जा सके।

सैंपल भेजे गए लैब में जांच के लिए

नारकोटिक्स विभाग ने ऑफिस से बरामद दवाइयों के कई सैंपल कब्जे में लिए और उन्हें फोरेंसिक व ड्रग कंट्रोल लैब में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सैंपल रिपोर्ट आने के बाद यह साफ होगा कि किन दवाइयों को बिना अनुमति, गलत लाइसेंस अथवा गलत प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर सप्लाई किया जा रहा था। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि कुछ दवाइयों पर विशेष निगरानी रखनी होती है और बिना उचित दस्तावेजों या लाइसेंस के उनका व्यापार NDPS एक्ट के अंतर्गत अपराध माना जाता है। इसलिए कंपनी के कारोबार की पूरी जांच की जा रही है।

सोलन की एक फार्मा कंपनी सप्लाई करती है दवाइयां

जांच में यह भी सामने आया है कि सोलन (हिमाचल प्रदेश) की एक फार्मास्यूटिकल कंपनी ट्रिडेंट ड्रग को दवाइयों की सप्लाई करती है। नारकोटिक्स विभाग अब इस सप्लाई चेन की भी जांच करेगा कि किन परिस्थितियों में और किन दस्तावेजों के आधार पर यह दवाइयां भेजी जा रही थीं। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दवाइयों की सप्लाई पूरी तरह कानूनी थी या फिर इसमें कोई अवैध गतिविधि शामिल है।

जांच जारी, रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्यवाही

नारकोटिक्स विभाग ने फिलहाल ट्रिडेंट ड्रग कंपनी के दफ्तर को सील कर दिया है और दवाइयों के सैंपल जांच में लगे हुए हैं। विभाग के अनुसार, लैब रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। यदि प्रतिबंधित दवाइयों की गलत तरीके से सप्लाई साबित होती है, तो यह मामला NDPS एक्ट के गंभीर प्रावधानों के तहत दर्ज किया जाएगा।

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