08/02/26

यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का प्रदर्शन; डीसी कार्यालय में सौंपा ज्ञापन

जे कुमार यमुनानगर , 08 फरवरी 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में जारी किए गए 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलराइजेशन 2026' को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर आज लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (लोसुपा) ने अम्बाला में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने अनाज मंडी से डीसी कार्यालय तक रोष मार्च निकाला और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

समानता और भेदभाव मुक्त परिसर की मांग पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश पंचाल ने बताया कि केंद्र सरकार 13 जनवरी 2026 को यह नया नियम लेकर आई है, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, वर्ग, लिंग और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के छात्रों के साथ उत्पीड़न और भेदभाव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे न केवल छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का भी हनन हो रहा है।

विरोध को बताया 'मिथ्या प्रचार' पार्टी नेताओं ने कुछ संगठनों द्वारा इस नियम के विरोध को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • कुछ संगठन इसे 'एससी एक्ट' की तरह दुरुपयोग का माध्यम बताकर भ्रम फैला रहे हैं।

  • प्रस्तावित कमेटी में निजी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं है, यह केवल संस्थागत सुधार के लिए है।

ज्ञापन में रखी गई मुख्य मांगें: लोसुपा ने सरकार और राष्ट्रपति से मांग की है कि प्रस्तावित कमेटी का गठन न्यायसंगत हो। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • स्पष्ट संख्या का निर्धारण: कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, महिला और सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की संख्या स्पष्ट रूप से तय की जाए।

  • पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व: विश्वविद्यालयों में प्रभावशाली वर्गों के वर्चस्व को देखते हुए कमेटी में आधे से अधिक सदस्य वंचित और पिछड़े वर्गों से होने चाहिए।

  • उचित हिस्सेदारी: शिक्षा, न्यायपालिका और राजनीति में वंचित वर्गों की उचित भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

राष्ट्रीय स्तर पर अभियान पार्टी नेता जगमाल ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार सैनी के नेतृत्व में आज पूरे हरियाणा के जिला मुख्यालयों पर यूजीसी के समर्थन में ज्ञापन सौंपे गए हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी वंचितों को संविधान प्रदत्त अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल सका है, जिसे यह नया नियम सुनिश्चित कर सकता है। प्रदर्शन के दौरान सुशील कुमार सहित अन्य पदाधिकारियों ने दोहराया कि यह नियम किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल भेदभाव के खिलाफ है।

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