08/03/25

केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने शहद मिशन के तहत छह राज्यों में मधुमक्खी बक्से और हनी कॉलोनी वितरित कीं

आरएस अनेजा, 08 मार्च नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘नए भारत के लिए नई खादी’ अभियान को मजबूत करने के लिए, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने दिल्ली में केवीआईसी के राजघाट कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये छह राज्यों में 205 मधुमक्खी पालकों को 2,050 मधुमक्खी बक्से, हनी कॉलोनी और टूलकिट वितरित किए।

वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गांवों में ‘मीठी क्रांति’ फैलाने के दृष्टिकोण के अनुरूप, मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी कालोनियों और मधुमक्खी बक्सों का वितरण करने के लिए ‘हनी मिशन’ शुरू किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि महाकुंभ के दौरान 14 जनवरी से 27 फरवरी, 2025 तक प्रयागराज में एक राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘खादी क्रांति’ के परिणामस्वरूप, प्रदर्शनी में 12.02 करोड़ रुपये मूल्य के खादी उत्पादों की ऐतिहासिक बिक्री दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में 98 खादी स्टॉल और 54 ग्रामोद्योग स्टॉल लगाये गए थे, जिनमें सामूहिक रूप से खादी में 9.76 करोड़ रुपये और ग्रामोद्योग उत्पादों में 2.26 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई।

कारीगरों को संबोधित करते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष ने याद किया कि 2016 में गुजरात के बनासकांठा के दीसा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘श्वेत क्रांति’ के साथ-साथ ‘मीठी क्रांति’ का आह्वान किया था। इससे प्रेरित होकर केवीआईसी ने 2017 में ‘हनी मिशन’ की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक 20,000 से अधिक लाभार्थियों को 2 लाख मधुमक्खी के बक्से और मधुमक्खी कालोनियां मिल चुकी हैं। उन्होंने आगे बताया कि ‘मन की बात’ के 75वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने मधुमक्खी पालन के लाभों पर चर्चा की थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि शहद के अलावा मधुमक्खी का मोम भी आय का एक प्रमुख स्रोत है। दवा, खाद्य, वस्त्र और कॉस्मेटिक उद्योगों में मधुमक्खी के मोम की बहुत मांग है।

इसलिए, अधिक से अधिक किसानों को अपनी कृषि पद्धतियों के साथ मधुमक्खी पालन को एकीकृत करना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि उनके जीवन में मिठास भी आएगी और देश शहद उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।

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