27/05/26

कैथल के फरल गांव में मिले कुषाण काल के अवशेष: डीसी अपराजिता ने पुरातत्व विभाग की टीम के साथ किया ऐतिहासिक टीले और प्राचीन स्तूप का निरीक्षण

कैथल, 27 मई (अन्‍नू): कैथल जिले की प्राचीन और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक पटल पर लाने के लिए जिला प्रशासन और हरियाणा पुरातत्व विभाग ने सांझा कवायद तेज कर दी है। कैथल की जिला उपायुक्त (DC) अपराजिता ने मंगलवार 26 मई 2026 को ऐतिहासिक फरल गांव का विशेष दौरा कर वहां मौजूद कुषाण कालीन एवं मध्य कालीन पुरास्थलों और प्राचीन अवशेषों का गहनता से निरीक्षण किया। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान उनके साथ विशेष रूप से हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने क्षेत्र की इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, सुरक्षा और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

कुषाण काल का स्तूप और प्राचीन चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन (Painted Red Ware) बने आकर्षण का केंद्र

दौरे के बाद विस्तृत जानकारी साझा करते हुए डीसी अपराजिता ने बताया कि फरल गांव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत समृद्ध प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जिसकी जड़ें इतिहास में बहुत गहरी हैं।

निरीक्षण के दौरान सामने आईं मुख्य बातें:

  • कुषाण कालीन स्तूप: गांव में कुषाण काल (Kushan Period) से संबंधित एक बेहद महत्वपूर्ण प्राचीन स्तूप मौजूद है, जिसे सहेजने की तत्काल आवश्यकता है।

  • प्राचीन कलाकृतियां: प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान इस ऐतिहासिक स्थल से पेंटेड रेड वेयर (चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन), प्राचीन कलाकृतियां और कई अन्य पुरातात्विक अवशेष मिले हैं। ये साक्ष्य इस क्षेत्र की प्राचीन गौरवमयी पृष्ठभूमि को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक रूप से समझने में मील का पत्थर साबित होंगे।

  • साक्ष्य जुटाने के प्रयास: डीसी ने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग मिलकर इस क्षेत्र में कुषाण काल और मध्यकाल से जुड़े अन्य पुख्ता साक्ष्य जुटाने के लिए बड़े स्तर पर काम करेंगे। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के मानकों के अनुरूप आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

फल्गु तीर्थ में टेका माथा; दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से हैं मानव बसावट के प्रमाण

दौरे के दौरान डीसी अपराजिता और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने विख्यात फल्गु तीर्थ स्थित पुराने व नए मंदिरों में माथा टेका और पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही टीम ने फल्क ऋषि आश्रम स्थल का भी बारीकी से मुआयना किया।

हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार ने इस स्थल की ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि फरल क्षेत्र एक दुर्लभ पुरातात्विक साइट है, जहां कुषाण काल से लेकर मध्यकाल तक की सांस्कृतिक निरंतरता (सांस्कृतिक जुड़ाव) के जीवंत प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक हुए प्रारंभिक अध्ययनों के अनुसार, इस पावन क्षेत्र में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (2nd Century BC) के आसपास से ही मानव बसावट की शुरुआत हो चुकी थी। यहां का प्राचीन टीला और धार्मिक स्थल आज भी न केवल स्थानीय लोगों की अगाध आस्था का केंद्र हैं, बल्कि भारतीय इतिहास की कई अनसुलझी कड़ियों को खुद में समेटे हुए हैं।

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