प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में चमका करनाल का सुमित: दो स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनवाया अपनी कला का लोहा
करनाल, 3 जुलाई (अन्नू): गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित हुई 'प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप' में हरियाणा के करनाल जिले के उभरते हुए योगासन खिलाड़ी सुमित ने इतिहास रच दिया है। सुमित ने इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो अलग-अलग स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) जीतकर न सिर्फ प्रदेश, बल्कि पूरे देश का नाम वैश्विक पटल पर रोशन किया है।
79 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाई अद्भुत शारीरिक क्षमता
अहमदाबाद में आयोजित इस भव्य प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में दुनिया भर के 79 देशों के करीब 522 शीर्ष खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। इतने बड़े और कड़े मुकाबले के बीच करनाल के सुमित ने अपनी अद्भुत योग तकनीक, संतुलन और बेजोड़ शारीरिक क्षमता का ऐसा लोहा मनवाया कि रेफरी और दर्शक दीर्घा में बैठे लोग दंग रह गए। सुमित ने चैंपियनशिप के दो बड़े और कड़े इवेंट्स में हिस्सा लिया और दोनों में ही शीर्ष स्थान हासिल किया।
इन दो सीनियर पुरुष कैटेगरीज में जीते स्वर्ण पदक
सुमित ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर दो अलग-अलग प्रतियोगिताओं में देश की झोली में स्वर्ण पदक डाले:
लेग बैलेंस इंडिविजुअल इवेंट: सीनियर पुरुष कैटेगरी के इस बेहद कठिन मुकाबले में सुमित ने अपने पैरों के बेहतरीन संतुलन और एकाग्रता का प्रदर्शन करते हुए पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
ट्रेडिशनल ग्रुप इवेंट: इसके बाद उन्होंने ट्रेडिशनल ग्रुप इवेंट की सीनियर पुरुष कैटेगरी में भी अपनी टीम के साथ सर्वश्रेष्ठ तकनीकी प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया।
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के नेशनल कैंप में की थी तैयारी
दोहरे स्वर्ण पदक विजेता सुमित ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपनी कड़ी ट्रेनिंग और गुरुओं को दिया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कड़े मानकों के अनुसार महीनों तक पसीना बहाया था।
चैंपियनशिप से ठीक पहले उन्होंने 'स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (SAI) की ओर से अहमदाबाद में ही आयोजित किए गए विशेष राष्ट्रीय कोचिंग कैंप (National Coaching Camp) में हिस्सा लिया था। इस उच्च स्तरीय ट्रेनिंग शिविर के दौरान उन्हें योग के गहन तकनीकी प्रशिक्षण, शारीरिक क्षमता के विकास (Physical Conditioning), मानसिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिना किसी दबाव के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के कई महत्वपूर्ण गुर सीखने को मिले थे, जिसके बल पर वे यह मुकाम हासिल करने में कामयाब रहे।
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