श्रीमद्भागवत द्वारा ही भक्ति , ज्ञान व वैराग्य की प्राप्ति संभव है - मुद्रगल शास्त्री महाराज
जे कुमार, अम्बाला 10 सितम्बर - श्री सनातन धर्म सभा (पंजी0) अंबाला छावनी के पितृ उद्धार हेतु संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन पर अमृतवर्षा करते हुए श्रीराम मुद्रगल शास्त्री महाराज वृन्दावन वाले ने परमसत्य का ध्यान करने की बात कहीं है। जो इस दृश्यमान जगत का जन्म ,पालन व संहार करने वाला है, वही परमसत्य है, परमसत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सत्य के साथ किया गया कर्म ही भगवान है।
महाराज ने कथा ज्ञानयज्ञ पर प्रकाश डालते हुए कहा श्रीमद्भागवत ऐसा विलक्षण ग्रंथ है जिसका आज तक न तो कोई पार पा सका, न पार पा सकेगा। गहरे उतरकर इसका अध्ययन-मनन करने पर नित्य नए-नए विलक्षण भाव प्रकट होते हैं। यह कालरूपी सर्प के मुख का गा्रस होने से बचाता है।
कथा विस्तार में उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत द्वारा ही भक्ति , ज्ञान व वैराग्य की प्राप्ति संभव है। इस कथा के प्रताप से ही व्यस्नकारी धुंधकारी की प्रेतयोनि से मुक्ति संभव हो पाई है। श्रीमद्भागवत एक पका हुआ फल है जिस पर शुक नाम के तोते का मुख लगा है इसलिए वो अमृत के समान है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को भागवत रस का पान तब तक करता चाहिए जब तक शरीर में प्राणों का संचार हो रहा हो।
कथा पंडाल महाराज को प्रो. तारा चन्द गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, माया राम बंसल, लक्ष्मी नारायण खन्ना, सुशील गोयल, राकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, संजय मल्होत्रा, प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह तथा मन्दिर पुजारियों आदि ने महाराज श्री को पुष्प हार भेंट कर अभिनंदन किया।
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