अंबाला सिटी: अग्रवाल भवन में इस्कॉन की सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा संपन्न; अंतिम दिन श्रीकृष्ण लीलाओं का हुआ मनमोहक वर्णन
अंबाला, 08 अगस्त (अन्नू): अंबाला सेक्टर-10 स्थित अग्रवाल भवन में इस्कॉन प्रचार समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार को भव्य और आध्यात्मिक समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान किया।
व्यासपीठ से कथा व्यास साक्षी गोपाल दास ने प्रवचन देते हुए कहा कि कलियुग के प्रभाव और दुखों से बचने का एकमात्र साधन निरंतर भगवान के नाम का जाप करना है।
भक्त की निष्काम भक्ति का महत्व
कथा व्यास ने भक्ति विनोद ठाकुर और चित्रकेतु महाराज के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया:
भक्ति विनोद ठाकुर का प्रसंग: उन्होंने बताया कि संत भक्ति विनोद ठाकुर भगवान से यही प्रार्थना करते थे कि यदि उन्हें वैकुंठ धाम न मिले, तो किसी भक्त के घर के पास नाली के कीड़े के रूप में जन्म मिले। ताकि उन्हें संतों के चरणों की धूल, आरती की ध्वनियां और भक्तों का जूठन प्राप्त करने का सौभाग्य मिलता रहे।
चित्रकेतु महाराज की कथा: इसी प्रकार चित्रकेतु महाराज ने भी इंद्र पद भोगने के बाद यही याचना की थी कि उनका अगला जन्म किसी प्रभु भक्त के दास के घर ही हो।
माखन चोरी और नलकुबेर-मणिग्रीव उद्धार की कथा
कथा में भगवान की बाल लीलाओं और अहंकार मुक्ति के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया:
मोती गोपी व माखन चोरी: बालगोपाल द्वारा गोपी के घर माखन चुराने के प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
नलकुबेर और मणिग्रीव का उद्धार: कुबेर के पुत्रों (नलकुबेर और मणिग्रीव) की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि धन के अहंकार में चूर दोनों भाइयों ने मंदाकिनी नदी तट पर नारद मुनि का अनादर किया था। नारद मुनि के श्राप से वे वृक्ष योनि में चले गए। बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने बाल रूप में उनका स्पर्श कर उन्हें यक्ष योनि से मुक्ति प्रदान की।
आभार व्यक्त कर बांटा गया लंगर व प्रसाद
कथा के समापन अवसर पर इस्कॉन प्रचार समिति की ओर से सात दिनों तक चले इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने वाले सभी कार्यकर्ताओं, दानदाताओं और श्रद्धालुओं का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कथा के उपरांत महाआरती का आयोजन हुआ और उपस्थित सभी भक्तों में लंगर व प्रसाद का वितरण किया गया।
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