27/11/25

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुसार इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) रेगुलेशन में व्यापक बदलाव लाने की जरूरत -डॉ. रोहित दत्त

जे कुमार, अम्बाला 27 नवम्बर : - राजीव गांधी गवर्नमेंट कॉलेज, साहा में मंगलवार को “इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर)” विषय पर कॉलेज के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई क्यू ए सी ) तथा उच्चतर शिक्षा विभाग, पंचकूला के सहयोग से एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।



संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 114 प्रतिभागियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में गांधी मेमोरियल नेशनल कॉलेज (जी.एम.एन. कॉलेज) के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञ वक्ताओं ने आईपीआर के महत्व, इसकी विभिन्न श्रेणियों तथा शोध एवं नवाचार पर इसके प्रभाव पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।



आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुसार इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) रेगुलेशन में व्यापक बदलाव लाने की जरूरत है क्योंकि कंप्यूटर एलगोरिदम,  कंप्यूटर से संबंधित कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा किये गये शोध में मुख्य लेखक कौन माना जायेगा!  आर्टिफिशल इंटेलीजेंन्स के माध्यम से किये गये शोध या रिसर्च कार्यों क़ो ध्यान रखते हुए कंप्यूटर ‑रिलेटेड इन्वेंशन्स (सी आर आई'स) 2025 के मसौदा दिशानिर्देश” जारी किए। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य सॉफ़्टवेयर, एल्गोरिदम और कृत्रिम‑बुद्धिमत्ता‑सम्बंधी आविष्कारों की पेटेंट योग्यता को स्पष्ट करना है।



मसौदा में विशेष रूप से आधुनिक तकनीकों – ए आई /एम एल , ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग – को शामिल किया गया है, जिससे इन क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। अपने संबोधन में डॉ. रोहित दत्त ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज शिक्षा और शोध का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ये अधिकार न केवल नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं बल्कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं में मौलिकता की भावना को भी मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि रचनात्मक उपलब्धियों की सुरक्षा हेतु आईपीआर के प्रति जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की संगोष्ठियाँ युवा शोधकर्ताओं को नई दिशा प्रदान करती हैं और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। संगोष्ठी में डॉ राजेंदर देसवाल, पूर्व निदेशक, आईपीआर सेल, एनआईटी कुरुक्षेत्र डॉ. राहुल तनेजा, वैज्ञानिक पेटेंट सूचना केंद्र, एचएससीआईटी, पंचकूला तथा यूजीसी सूचीबद्ध जर्नल “नाद-नद” के निदेशक डॉ. रवि शर्मा भी उपस्थित रहे।

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