16/01/26

जीएमएन कॉलेज, अंबाला कैंट में सात दिवसीय पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास कार्यशाला का शुभारंभ

जे कुमार अम्बाला छावनी, 16 जनवरी 2026: गांधी मेमोरियल नेशनल (जी.एम.एन.) कॉलेज में 'मिशन ग्रीन' एवं 'लीप' के सहयोग से “पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास” विषय पर आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन की गतिविधियाँ सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। इस विशेष आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को वर्मी-कम्पोस्टिंग, ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन और वर्षा जल संचयन जैसे गंभीर पर्यावरणीय विषयों के प्रति जागरूक करना है।

कार्यशाला के मुख्य सत्र में मुंबई से पधारे प्रख्यात पर्यावरणविद् श्री शुभजीत मुखर्जी ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पक्षों से रूबरू कराया। श्री मुखर्जी ने वर्मी-कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और हरित विकास से जुड़े उन उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला जिन्हें विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में अपना सकते हैं। उनके व्याख्यान ने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रातः 10:00 बजे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त द्वारा किया गया। उन्होंने मुख्य अतिथि श्री शुभजीत मुखर्जी का स्वागत हरियाली के प्रतीक स्वरूप एक पौधा भेंट कर किया। अपने संबोधन में डॉ. दत्त ने इस कार्यशाला को महाविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति न केवल समझ बढ़ती है, बल्कि उनमें जिम्मेदारी की भावना भी प्रबल होती है। उन्होंने एनएसएस, एनसीसी, इको क्लब और वाईआरसी जैसे छात्र संगठनों की सक्रियता की सराहना करते हुए इसे युवाओं की पर्यावरणीय चेतना का प्रमाण बताया।

इस अवसर पर पर्यावरणविद् श्री शाहिन शर्मा ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा पर्यावरण के प्रति स्वयं आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेना अत्यंत सराहनीय है और जी.एम.एन. कॉलेज की यह पहल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने वर्मी-कम्पोस्टिंग की तकनीक और वर्षा जल संचयन के व्यावहारिक मॉडल को समझने में गहरी रुचि दिखाई। यह सात दिवसीय अभियान युवाओं को सतत विकास की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हो रहा है।

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