Heart Problem: आप भी तो नहीं हैं हार्ट के मरीज ? हार्ट अटैक से बचने के लिए डॉक्टर ने बताया '5S' फॉर्मूला
चंडीगढ़, 20 अप्रैल (अभी): हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ाती जा रही हैं। हाल के वर्षों में हृदय रोगों के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। अब ये बीमारी सिर्फ उम्रदराज लोगों तक ही सीमित नहीं रह गई है। बीते दिनों ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें 20 से कम उम्र वालों की हार्ट अटैक से मौत हुई है। कम उम्र के लोग, यहां तक कि बच्चे भी इसका शिकार पाए जा रहे हैं।
एक प्रकाशित रिपोर्ट्स में बताया था कि अप्रैल में ही मध्य प्रदेश के इंदौर में 18 साल के दो किशोरों की मौत हार्ट अटैक से मौत हो गई। इससे पहले सितंबर में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में गुजरात में छठवीं कक्षा के बच्चे की सडेन हार्ट अटैक से मौत की खबर आई थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के चलते हृदय स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के लिए इसे एक जोखिम कारक माना जा सकता है। चूंकि हृदय रोग और हार्ट अटैक मौजूदा समय के सबसे चर्चित विषयों में से एक बने हुए हैं, इस वजह से हार्ट हेल्थ को लेकर हमें सतर्क हो जाना चाहिए।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए इन 5S पर दें ध्यान
दिल्ली स्थित पीएसआरआई हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि प्रकाश कहते हैं, सभी लोग अगर 5S फॉर्मूले पर ध्यान दे लें तो इससे हृदय को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में विशेष मदद मिल सकती है।
1. स्मोकिंग- स्मोकिंग या धूम्रपान से दूरी बनाना हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए सबसे जरूरी है। युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के लिए इसे प्रमुख कारण माना जा रहा है।
2. स्लॉट और शुगर- नमक और चीनी दोनों का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता है। इसका सेवन कम करें।
3. सिटिंग- ज्यादा देर बैठे रहने की आदत भी आपके हार्ट के लिए ठीक नहीं है। इसलिए नियमित रूप से व्यायाम जरूर करें। ऑफिस में काम करते हैं तो हर आधे घंटे पर थोड़ी देर के लिए वॉक जरूर करें।
4. स्लीप और स्ट्रेस- हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी नींद लेना और स्ट्रेस कम रखना दोनों जरूरी है। अगर आप रात में 6-8 घंटे अच्छी नींद लेते हैं तो इससे स्ट्रेस भी कम होता है।
5. सीनियर्स- यदि आपको घर के सीनियर्स में किसी को हार्ट की बीमारी है तो फिर आपको भी होने का जोखिम अधिक हो सकता है। समय रहते डॉक्टरी सलाह और उपचार लेने से आप अपने जोखिमों को कम कर सकते हैं।