हरियाणा सरकार का करदाताओं को बड़ा तोहफा: 1 जून से शुरू हुई 'एकमुश्त निपटान स्कीम, 2026
जे कुमार अम्बाला, 1 जून 2026 : हरियाणा सरकार ने प्रदेश के व्यापारियों, कारोबारियों और करदाताओं को पुराने टैक्स विवादों से मुक्ति दिलाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहतकारी कदम उठाया है। सरकार द्वारा 1 जून 2026 से आगामी 120 दिनों के लिए (28 सितंबर 2026 तक) 'एकमुश्त निपटान स्कीम, 2026' (One Time Settlement Scheme - OTS) का शुभारंभ किया गया है।
डीईटी (DET) सेल के सुरेन्द्र कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इस योजना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह स्कीम सात अलग-अलग कराधान अधिनियमों (Tax Acts) के तहत निर्धारित बकाया देय राशि के निपटान का ऐतिहासिक प्रावधान करती है।
₹1 लाख तक का टैक्स है तो आवेदन की भी जरूरत नहीं; सब कुछ माफ
स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि किसी करदाता पर किसी संबंधित अधिनियम के अंतर्गत किसी एक वर्ष में 1 लाख रुपये तक का टैक्स बकाया है, तो उसे इस स्कीम के तहत आवेदन करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है। उसका उस वर्ष के लिए उस अधिनियम में संपूर्ण टैक्स (कर), ब्याज (Interest) और जुर्माना (Penalty) राशि को सरकार द्वारा स्वतः (Automatically) पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा।
हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत विशेष छूट
डीईटी सेल के अनुसार, पूर्ववर्ती हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 (जिसे 1 अप्रैल 2003 को वैट अधिनियम लागू होने के बाद निरस्त कर दिया गया था) के मामले बहुत पुराने हैं। इसलिए इस अधिनियम के तहत 1 लाख रुपये से अधिक के टैक्स बकाया वाले सभी मामलों में 70 प्रतिशत की भारी कर छूट दी जा रही है।
वैधानिक प्रपत्र (Statutory Forms) जमा करने पर मिलेगी नई राहत
बड़ी संख्या में व्यापारियों का टैक्स बकाया फॉर्म सी, फॉर्म एफ, फॉर्म एच, फॉर्म ई1, ई2, वैट सी-4, वैट डी1 और डी2 जैसे जरूरी फॉर्म जमा न होने के कारण लंबित है, जिनमें से कई मामले अपीलीय स्तर पर हैं। उनके लिए नियम इस प्रकार हैं:
3 महीने में वेरिफिकेशन: यदि कोई व्यक्ति अब ये प्रपत्र (Forms) प्रस्तुत करता है, तो उसके टैक्स की मांग को उन प्रपत्रों से मिलने वाली छूट के बराबर घटा दिया जाएगा, बशर्ते ये फॉर्म 3 महीने के भीतर सत्यापित (Verify) हो जाएं।
इन्हें नहीं मिलेगा लाभ: यह लाभ उन वैधानिक प्रपत्रों पर लागू नहीं होगा जिन्हें पहले अधिकारियों द्वारा खारिज किया जा चुका है। साथ ही, जिन फर्जी/नकली फर्मों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) चल रही है, उन्हें इस स्कीम से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
दायरा: यह छूट केवल 'हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003' और 'केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956' से संबंधित बकाये पर ही लागू होगी।
🗃️ बॉक्स: कर छूट की विभिन्न श्रेणियां और स्लैब
1. हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के तहत:
₹1 से ₹1 लाख तक बकाया: 100% टैक्स छूट + 100% ब्याज व जुर्माना माफ।
₹1 लाख से अधिक के अन्य सभी मामले: 70% टैक्स छूट + 100% ब्याज व जुर्माना माफ।
2. अन्य छह अधिनियमों के अधीन उपलब्ध टैक्स छूट (स्लैब के अनुसार):
आवेदक को प्रत्येक पूर्ववर्ती स्लैब (Progressive Slab) में दी गई छूट का पूर्ण लाभ उसके बकाया टैक्स की स्लैब तक क्रमिक रूप से मिलेगा। सभी स्लैब में ब्याज और जुर्माना 100% माफ रहेगा।
बकाया टैक्स की राशि (Slab)टैक्स में मिलने वाली छूट (%)ब्याज और जुर्माना में छूट (%)₹1 से ₹1 लाख तक100%100% (पूर्ण माफ)₹1 लाख से अधिक और ₹10 लाख तक60%100% (पूर्ण माफ)₹10 लाख से अधिक और ₹1 करोड़ तक50%100% (पूर्ण माफ)₹1 करोड़ से अधिक और ₹10 करोड़ तक40%100% (पूर्ण माफ)₹10 करोड़ से अधिक और ₹30 करोड़ तक35%100% (पूर्ण माफ)₹30 करोड़ से अधिक और ₹60 करोड़ तक30%100% (पूर्ण माफ)₹60 करोड़ से अधिक की राशि पर0%100% (पूर्ण माफ)
विवादित मामलों को वापस लेने की शर्त और किस्तों में भुगतान की सुविधा
केस वापस लेने की शर्त: जो करदाता किसी आदेश के खिलाफ अदालत या अपीलीय अथॉरिटी में मुकदमेबाजी में शामिल हैं, वे भी इस स्कीम का लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते उन्हें अपनी लंबित अपील या मुकदमे को वापस लेना होगा।
किस्तों (Installments) की सुविधा: सरकार ने राहत देते हुए निपटान राशि को किस्तों में चुकाने का विकल्प भी दिया है:
₹5 लाख तक की निपटान राशि: इसके लिए कोई किस्त नहीं मिलेगी, पूरा भुगतान एक बार में करना होगा।
₹5 लाख से अधिक और ₹25 लाख तक: दो समान किस्तें मिलेंगी (पहली आवेदन के समय और दूसरी अंतरिम आदेश की तिथि से 60 दिनों के भीतर)।
₹25 लाख से अधिक की राशि पर: तीन किस्तें मिलेंगी (आवेदन के समय 40%, 60 दिनों के भीतर दूसरी किस्त 30%, और शेष 30% राशि की तीसरी किस्त अंतरिम आदेश से 120 दिनों के भीतर देनी होगी)।
कार्रवाई से मिलेगी मुक्ति:
जिन मामलों में करदाताओं का 'एकमुश्त निपटान' आवेदन सही पाया जाएगा और उसे विभाग द्वारा स्वीकार कर लिया जाएगा, उन आवेदकों के खिलाफ उस विवादित बकाये को लेकर भविष्य में विभाग द्वारा कोई भी दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।
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